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Dr. Abhishek Manu Singhvi, MP and Spokesperson, AICC addressed the media

Created on Monday, February 06, 2017 12:00 AM डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि दो मुद्दों पर आज मैं बात करना चाहता हूं, एक तो है Unusual Scam हरियाणा से लगभग 3000 करोड़ का, 400 एकड़ जमीन का। जिसमें जवाबदेही चाहते हैं हम सरकार की, केंद्र की और विशेष रुप से हरियाणा सरकार की भी। विचित्र बात ये है कि 2014 के बाद अपने ही एक विशिष्ठ व्यक्ति को हरियाणा सरकार चीफ सेक्रेट्री नियुक्त करती है, देसी जी को। अब इस महिने 2 जनवरी को एक ऑर्डर पास होता है क्लेक्टर के द्वारा ग्वालपहाड़ी, जो जानी-मानी जगह से, दिल्ली से सटा हुआ है। वहाँ पर 400 एकड़ जो अभी तक Gurgaon Municipal Corporation के नाम थी, वो डिलिस्ट हो जाता है, कई सारे Individuals के नाम से। 400 एकड़ एक प्रकार से दिल्ली एनसीआर हो गया जो अभी तक Gurgaon Municipal Corporation में था एक लिखित ऑर्डर के द्वार, जो क्लेक्टर सत्यप्रकाश टी.एल ने पास किया है, 2 जनवरी को। कहानी और रोचक होती है कि इस ऑर्डर को पास करने के बाद और इसमें लिखा है कि ये ऑर्डर मैंने एक प्रकार से चीफ सेक्रेट्री के आदेशानुसार पास किया है, ये क्लेक्टर के ऑर्डर में लिखा है जो कि तीसरा पहलू है। चौथा पहलू - और भी रोचक है इसे आप इनाम समझ लीजिए कि इस ऑर्डर के इनाम के तौर पर माननीय क्लेक्टर साहब को डॉयरेक्टर टाऊन एंड कन्ट्री प्लेनिंग बना दिया जाता है, जनवरी 2017 में।

 

जब हल्ला होता है और जब ये गलतियाँ दिखती हैं और मालूम होता है कि घपला हुआ है तो हमारा ये कहना है कि सरकार मुख्यमंत्री घड़ियाली आँसू बहाकर, ढोंग रचकर, दिखावा करके अपनी ही सरकार को कहते हैं कि अपने ही क्लेक्टर के विरुद्ध जिनको उन्होंने डॉयरेक्टर टाऊन एंड कन्ट्री प्लेनिंग बना दिया है, जिसने कहा है कि आदेश आया है चीफ सेक्रेट्री से, उसी ऑर्डर के विरुद्ध वो डिविजलन कमीश्न में अपील करते हैं और उस ऑर्डर का स्टे मांगते हैं। अगर स्टे नहीं मांगते तो तुरंत Gurgaon Municipal Corporation को 400 एकड़, मुझ से इन सबके नाम हो जाता और एक बहुत बड़ा घोटाला कार्यांवित हो जाता। तो हम 4-5 बातें रखना चाहते हैं आप के माध्यम से।

 

पहला,  इसकी व्यापक जांच होनी चाहिए, एक निष्पक्ष संस्था द्वारा।

 

दूसरा, इसकी फौजदारी और सिविल दोनों जांच होनी चाहिए। इसमें क्रिमेनिलिटी भी हो सकती है, ये संक्षिप्त जांच से पता चल जाएगा।

 

तीसरा, ये ऑर्डर में लिखा है कि चीफ सेक्रेट्री के आदेशानुसार पास हुआ है तो विशेष रुप से अधिकारी की नियुक्ति के विषय में जांच होनी चाहिए।

 

चौथा, चीफ सेक्रेट्री ऐसे आदेश अपने आप नहीं देते, उपर से कहाँ से आया था, जो मुख्य सचिव के माध्यम से क्लेक्टर तक पहुंचा?

 
पाँचवा, आपने क्लेक्टर के विरुद्ध कौन सी कार्यवाही की है, सिवाए उनको प्रमोशन देने की, इनाम देने की, उनको डॉयरेक्टर टाऊन एंड कन्ट्री प्लेनिंग बनाने की, जो कि एक बहुत ही व्यापक और महत्वपूर्ण पद है?

 

ये बहुत मूल्यवान 400 एकड़ जमीन का मुद्दा है, जो ग्लावपहाड़ी में है - दिल्ली से ही सटा हुआ। सिर्फ आपके ढोंग से या घड़ियाली आँसू से ये नहीं माना जाऐगा। कि सरकार चौंक गई और चौंकने के बाद इसमें अपील की। क्योंकि ये भी विचित्र बात है कि सरकार अपने ही क्लेक्टर के ऑर्डर के विरुद्ध अपील करती है, जिसमें क्लेक्टर कह रहा है कि मेरे चीफ सचिव ने आदेश दिया है। ये बहुत विचित्र हैं, ढोंग है और गंभीर मामला है।

 

Dr. Singhvi said they should be investigated in the shortest possible time because this was the announcement in the shortest possible way because the facts are first of all startling serious but also comic at one level. 400 Acres of valuable land which is virtually in Delhi – Gawal Pahari is just on the Border of Delhi and Haryana – worth approximately Rs. 3,000 Crore is transferred, released and re-mutated from the Gurgaon Municipal Corporation name to the names of several individuals on a dispute which was going for 30 years.

 

The curious part is firstly that the Collector, in his order of 02.01.2017, notes specifically that he is acting as per the advice and orders of no less than the Chief Secretary of Haryana. Secondly, after this, the Collector is promoted as a Director, Town & Country Planning – a post far great in jurisdiction and powers regarding land in that entire area for the whole State of Haryana not merely Gurgaon. Thirdly, we value the value of the land which is of approx. Rs. 3,000 Crore. The Government, purely for cosmetic purposes, after an uproar and outcry raised purports to appeal. Strangely the Government appeals against its Collector's order to the Development Commissioner and gets a Stay. At the same time promoting the Collector, obviously it raises for 4-5 very clear issues which we ask through you, require very-very urgent, comprehensive investigation – firstly an independent non-biased Body to investigate the criminal and civil aspects of what is clearly a Scam and report within 4 to 6 weeks maximum. Secondly, the Government, particularly allot at the advice and instructions of the Chief Secretary recorded in the 02nd January.2017 order. Thirdly, Chief Secretaries do not act on their own so easily. So, who was the superior authority to the Chief Secretary to whom these instructions have been conveyed through the Chief Secretary to the Collector? Fourthly, why this promotion and no action against the Collector? These are vital issues because this is no less than a very big Scam of extremely valuable land in the immediate neighbourhood of Delhi.

 

श्री सिंघवी ने कहा कि दूसरा मुद्दा बजट से संबंधित रखता है। बजट का जो व्यापक स्वरुप आपने देखा है। आज हम विशेष रुप से शिक्षा के क्षेत्र बारे में कहना चाहता हूं, संक्षेप में। ये दुर्भाग्य की बात है, शिक्षा एक सेक्ट्रल न्यूट्रल चीज है। शिक्षा एक ऐसी चीज है जो पूरे आर्थिक व्यवस्था और पूरे देश के हर सेक्टर को प्रभावित करती है। चाहे आप कारीगर हों, चाहे आप लेबरर हों, प्रोफेसर हों। शिक्षा सबसे ज्यादा अहमियत रखती है किसी भी विकासशील देश के लिए। आपके सामने बड़े चौंकाने वाले तथ्य सामने आते हैं, जिनको ये बजट विशेष रुप से दुष्प्रभावित करता है।

 

शिक्षा के बारे में इतने भाषण करके सच्चाई ये है कि इस सरकार के आने के बाद हर वर्ष शिक्षा में जो बजटरी एलोकेशन होता है, बजट द्वारा, A और B जो बजट के एलोकेशन का प्रतिशत है कुल GDP से वो दोनों गिरे हैं, हर वर्ष प्रतिवर्ष। मैं आपको कुछ आंकडे देना आवश्यक समझता हूं, जो प्रकाशित भी हैं।

 

2013-14 में 4.57% था बजट का एक्सपेंडिचर शिक्षा में। कुल बजट में से 4.57% और GDP का अगर आप प्रतिशत लें तो ये था .63% । अगले वर्ष मोदी सरकार आई 2014-15 में यह 4.14% हो गया गिरकर GDP का हो गया .55%,  .63% से। मोदी सरकार के दूसरे वर्ष में जो हमारे समय में 4.57% था, उनके पहले वर्ष में गिरकर 4.14% हुआ। वो तीसरी बार 3.75% हो गया और .55% GDP वाला आंकड़ा .50% हो गया। अंत में 2016-17 में 3.65% हो गया, जो 3.75% था, मोदी सरकार के तीसरे वर्ष में। .50% और गिरा GDP के, .49% हो गया यानि .1 % और गिर गया। इस बार दिखावट के लिए जो इस बजट को दिया है माननीय वित्त मंत्री जी ने, उसमें 3.65% को दिखाया गया है 3.71%, जो कि सिर्फ एक भविष्य के लिए एलोकेशन है। वास्तविकता छिपी है इस बात में कि GDP के प्रतिशत के अनुसार वो .47% हो गया है। .49% से गिरकर इस वर्ष में।

 

ये मैं सिर्फ आंकड़े दिए थे, लेकिन आप इसका व्यापक चित्र देंखे कि कौन सा एक भी महत्वपूर्ण कार्य किया है शिक्षा में, इस सरकार ने आने के बाद, सिवाए रुकावटें डालना और आंकड़ों को कम करना।

 

हम "शिक्षा का अधिकार” लाए, प्रयत्न किया और हमारे शिक्षा का अधिकार लाने से GER (Gross Enrolment Ratio) प्राथमिक क्षेत्र में 96% हो गया। लेकिन माध्यमिक और वरिष्ठ स्तर पर, अभी भी माध्यमिक में 54% है और हायर में 24% है। यानि 96 लोग 100 में से जो प्राथमिक में जाते हैं उसमें से 40 हटकर 54 रह जाते हैं, माध्यमिक में (सैंकेडरी में) और 25-30 हटकर 24 रह जाते हैं वरिष्ठ में - सिनियर सैकेंडरी में। हमने बढोतरी करने का बहुत प्रयत्न किया। हमारे बजटरी एलोकेशन ज्यादा थे। हमारे जो विधायिकाओं ने जो पास किया RTE, क्रांतिकारी था। उस RTE में भी ये आवश्यक है कानून द्वारा, पहली बार भारत में हुआ कि इतना इन्फ्रास्ट्रक्चर आवश्यक है। गाईडलाईन हैं उस एक्ट के अंदर। वो भी अब मालूम हुई हैं कि 10 प्रतिशत स्कूल में प्राथमिक स्तर पर वर्तमान हैं।

 

हाँ उपलब्धियाँ बहुत की हैं एनडीए सरकार ने, आपको जुमले देकर। 'स्वयं' और 'संकल्प' दो शब्द दिए हैं माननीय प्रधानमंत्री जी ने लेकिन ठोस काम क्या हुआ, ये हम नहीं जानते। दो-दो स्कीम अनाउंस कर दी। स्किल इंडिया जो एक प्रकार से देखा जाए शिक्षा से संबंध रखता है, उसमें बहुत हल्ला-गुल्ला हुआ है। 20 अलग-अलग सरकारी संस्थाएं इसको कार्यांवित करने में लगी हैं, क्या कभी ऐसा सुना है कि 20 संस्थाएं एक ही कार्य करने में लगी हों। दूसरे जो उपलब्धियाँ की हैं वो संस्थाओं में अपने अनुपयुक्त व्य़क्तियों को पदासिन करना ICHR, FTII में, Text बुक को बदलना, एक ऐजेण्डे को पूरा करना। "अकबर दी ग्रेट” से 'ग्रेट' हटा देना उसको उपलब्धि बताना, इत्यादी-इत्यादी। शिक्षा की दयनीय दृष्टि में इतने ज्यादा उपदेश लाना, भाषण देना। लेकिन सच्चाई शिक्षा की ये है।  

 

And therefore, we are raising it before you because Education is sector neutral. It affects every segment irrespective of activity from the mason to the professional, to the manual labourer to the service class. Education is vital for any developing and transforming economy. The sad story of Education is reflected in 8 figures exactly co-terminus with the terms of the BJP-NDA Government.

 

If you take just the year before, when we left in 2013-14 the %age of Budgetary expenditure on Education, as a %age of the total Budget was 4.57% and that translates into %age of the GDP to be 0.63% of GDP. That figure of 2013-14 has respectively, in 2014-15, fell to 4.14% from 4.57% and the GDP fell from 0.63% of GDP to 0.55 %. In the second BJP year of governance -2015-16 - it fell to 3.75% further from 4.14% and the GDP figure fell to 0.5% - 3.75% and 0.5% and the last year it fell further to 3.65% and 0.49% - continuous fall. And the most important international paradigm is the %age of Budgetary expenditure is %age of GDP that has come down from 0.63% to 0.49%,. In this current year, although for sake of form, the budgetary %age increased to 3.71%, the real telltale away sign, of the cat out of the bag comes because the GDP %age has gone down further to 0.47%. So the GDP has declined from 0.64%, 0.55%. 0.5%, 0.49% and this budget brings it to 0.47%, is the spend on Education by the budget expressed as a %age of GDP. This brings a larger issue – what has this Government done even remotely concretely for Education HRD Sector.

 

We brought in RTE - a revolutionary thought. It is a story in the making, it is an unfulfilled task but even the progress - we got 96% Gross Growth Enrolment Ratio in the primary level. But unfortunately in the secondary level, it remains at 54%, in the senior level it remains at 24%. This Government has nothing to improve these ratios. In fact, the Act which we got – the RTE – which itself provides for a minimum list of infrastructure which each 'prathmik' or primary school must have. It is found that only 10-12% of schools have those? Unfortunately, this Government has been focused and concentrating on improving HRD and Education through its own distorted definitions.  Its definitions of improvements do not include GE Ratios, provision of infrastructure or increase of budgetary allocation. They include use of phrases and acronyms and 'Jumlas', which the PM is fond of. So he creates a 'Sankalp' and a 'Swayam' but we have virtually no figures of achievements for 'Sankalp' and a 'Swayam' – two schemes.

 

Energy is devoted by the names 'Skill-India' - another acronym - another Jumla - but 20 Government Departments, Institutions are supposed to be added to implement 'Skill-India'. I think it is an admission of failure. If you have anything being implemented in 20 departments, your energies are focused in appointing inappropriate, inapposite downright unsuitable persons to positions to occupy Institutions like ICHR and the FTII. Your focus is to re-write text books, your focus is to make cosmetic changes but where is the concrete achievement on the ground. That is the question we are asking through you.

 

On the question of Ms. Sashikala on being appointed General Secretary of AIADMK and later on CM of Tamil Nadu, Dr. Singhvi said we are going to be taking you sectorally through different parts of Budget over the next few days but what you are saying is important because it is only the Budget which is the culminating point you are highlighting. This Government is adapt, it is a master in first giving enormous, humongous powers to people at low levels, talking about minimum-government-maximum governance actually giving digression which transcends into the opposite maximum-digression minimum- governance increasing the discretionary zone to provide obviously nepotistic powers to low officials. All this is before the example you are giving by the way and then giving only speeches and rhetoric in speeches and seminars, that we are sensitizing the Departments, we are ensuring that there is no text terrorism.


Actually in the last Government, I would like to point a single point of tax terrorism and actually in his Government, there is nothing but all kinds of powers and not only to the Income Tax Deptt. but to 4 or 5 allied agencies which are inherently capable of misuse. Now coming to the specific example you have given, as you know, the IT Act, you can go back 6 years, that too on certain stated very strict criteria in Sections like 148, 147 etc. which I do not want to go into now. This government started demonetization with much fanfare and one of the original stated goals that you have it on your records that you will have almost                5 lakh or 4.5 lakhs crore money not coming in which will be as net gain. When all the  4 lakhs came in, so that you had a net Zero gap, the goal post were changed - the story was changed, that is alright but we now we are going to the IT authorities investigating 4 lakhs crore which are coming and adding to actual income. They do not tell you that this is a process of assessment. They will require more than 2 lakh new officers new recruits to go and assess that is to look at each penny of 4 lakhs crore which is being deposited. They ask you questions and send you notices and also an assessment and against that you will go to appeal in CIT appeals, somebody is going to appeal ITAT. Then decide finally this is this Government's creation. On top of it, ten years ago back or even longer, under the new dispensation means that you are having no safeguards except in speeches.  And unfortunately last but not the least, it is done because so that it can be used against inconvenient political opponents. That is the tragedy and that is the truth.

 

ऑर्गनाईजेशनल चुनाव के प्रश्न के उत्तर में श्री सिंघवी ने कहा कि ये पहले भी हमने कहा है मैं फिर से स्पष्ट कर दूं। पहला पहलू ये है कि इस देश में कांग्रेस ऐसी पहली पार्टी थी प्रादेशिक या अखिल भारतीय, जिसने व्यापक रुप से हर स्तर पर, डिस्ट्रीक लेवल तक चुनाव किए हैं, आंतरिक पार्टी के चुनाव। बल्कि चुनाव बहुत सारे कई तबकों से विरोध के बावजूद किए। राहूल गाँधी जी ने इस पूरे अभियान का नेतृत्व किया था। आप उनके डिटेल से अवगत हैं। दूसरा पहलू उस वक्त श्री राहूल गाँधी जी ने एक बहुत उच्चस्तरिय चुनाव आयोग की तरह संस्था बनाई थी, जिसमें सेवानिवृत्त बहुत ही प्रसिद्ध चुनाव आयोग के चीफ इलेक्शन कमीशन श्री लिंगदोह, श्री कृष्णमूर्ती थे और अन्य लोग थे और उनके आधार पर डिस्ट्रीक लेवल तक चुनाव हुए थे। कांग्रेस - अध्यक्ष पद के लिए भी चुनाव हो चुके हैं। इस बार इन सब चुनावों के लिए अतिआवश्यक हैं कि सही रुप से हों, व्यापक रुप से हों। सभी सूचियाँ और विशेष रुप से जो सदस्यलिस्ट हैं वो सब अपडेट हों और इसके लिए हमने थोड़ा समय मांगा है। नहीं तो चुनाव सबसे पहले इस देश में आंतरिक पार्टी चुनाव की पूरी एक विरासत हमने ही बनाई थी। हम उस पर विलंब नहीं करना चाहते, बस उसको लोजिकली ठीक करने की एक प्रक्रिया है। इतने चुनाव हो रहें हैं इस देश में, लेकिन लिस्ट पूरी तरह से तैयार नहीं हैं, वो समय हमने मांगा है। चुनाव आयोग किसी भी पार्टी के लिए एक अमूक तिथि निर्धारित नहीं कर सकता। हाँ सभी पार्टियों के लिए आवश्यक है कि वो चुनाव करें और हम उसमें अग्रिणिय हैं।  

 

AIADMK पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में श्री सिंघवी ने कहा कि मैं इसलिए कह रहा हूं कि आप सब्र रखें। प्राथमिक रुप से हमारा मत ये है कि AIADMK को अपना लिडर चुनने का अधिकार क्षेत्र है। लेकिन मैं श्री मुकुल वासनिक से अनुरोध कर रहा हूं, वो तमिलनाडू के इंचार्ज हैं कि वो प्रदेश के सभी नेताओं से और कांग्रेस से बात करके, इसमें कांग्रेस क्या स्टेंड लेगी, इससे आपको अवगत कराएगी।

 

On the question of Congress's organizational elections, Dr. Singhvi said do not forget that probably the first party to have intra-party elections on a massive scale down to the Tehsil and District level was the Congress Party. In fact, we had those elections despite much opposition even at the lower levels and different levels of our own Party. Shri Rahul Gandhi spearheaded that movement. Secondly, you remember that we had in fact, a very High-Powered Independent Election Commission kind of body of three retired CECs overseeing them. Thirdly, we have had elections even to the Congress President's post and you know the names who contested.  Now, therefore, other parties have been much more belated than us doing this. We are not cheery or hesitant in any manner doing it. Practical problem is that these things depend on updated membership list to have a proper real election. It is not always possible with so many State and Central elections going on to keep those lists updated in a real sense. So all that we have asked is for a deferment of sometime so that those can be updated and you can have meaningful elections. However, on a jurisdictional basis, we do not believe that the Elections Commission cannot kind of fix a date for any political party not only us. On the other hand, we are fully ready and willing to have it but on a deferment after we have got all the lists in order.

 
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