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Shri Anand Sharma, Dy. Leader, CPP, Rajya Sabha and Sr. Spokesperson AICC addressed the media.

श्री आनंद शर्मा ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि संसद के बजट सत्र का प्रथम चरण आज समाप्त हो जाएगा। लेकिन बजट का जो सत्र है उसका दूसरा चरण 9 मार्च से शुरु होगा। इसमें मुख्य दो ही बातें थी- एक तो राष्ट्रपति का अभिभाषण और दूसरा बजट। बजट पर चर्चा आज आरंभ हुई है, वो अधूरी रह गई राज्यसभा में, क्योंकि एक दिन का समय पर्याप्त नहीं है, तो बजट पर भी चर्चा पुन: आरंभ होगी मार्च महिने में। दोनों विषयों पर हमने अपनी टिप्पणी की है, राष्ट्रपति के अभिभाषण में विस्तृत रुप से बहस में हिस्सा लेते हुए जो कि ना केवल नीरस है, खोखला है और उसमें कोई रुपरेखा नहीं है देश के विकास लाने की। इस सरकार की सोच और प्राथमिकताएं गलत हैं। आज तक इस सरकार ने जो प्रतिबद्धताएं की थी, पहला अभिभाषण में 2014, दूसरा 2015, तीसरा 2016, ये चौथा अभिभाषण था, पहले के तीन आप उठा कर देख लें, अधिकांश में आप देखेंगे कि कुछ में काम नहीं हुआ और कुछ शुरु भी नहीं हुआ। आज वजनदार शब्दों को लाकर नई चीजों की घोषणा कर देते हैं और हर स्किम में प्रधानमंत्री जी नई योजना बना देते हैं। ना तो इनके कार्यकाल में रोजगार मिला है, जो वायदा किया था इन्होंने, जो चुनाव जीतने का एक कारण भी था कि दो साल में 2 करोड़ रोजगार देंगे। 5 करोड़ नौकरियाँ तो नहीं हुई। आप Labour Bureau का आंकड़ा देख लें उसमें मुश्किल से 1 लाख 15 हजार (जो अभी 3 दिन पहले आया, उसको पढ़ लें)। पूरे साल के अंदर रोजगार पैदा हुए जबकि मांग 2 करोड़ थी। लेकिन Labour Bureau के ये आंकड़े अपडेटिड हैं।

 

 These figures relate to the period prior to demonetization. Post demonetization tens of Millions of jobs has been lost across sectors. There have been job losses in organized sector, but in the informal economy, the job and the wage loss is very high. My conservative estimates, India would have lost in the informal sector which contributes 45% of India's total GDP and production, at least 45 million jobs. It is a frightening situation and the Government has not been able to answer anything. At the same time, the sectors which have been hurt most are labour intensive sectors, ceramic industry, leather industry, handloom, power looms, brassware, glassware, knitwear and you can travel all over the country, you will find the same scenario.

 

 हमारी सोच और समझ इसमें बड़ी स्पष्ट है कि हमारी इकोनोमी का दुबारा पटरी पर आने में समय लगेगा। जो GDP के आंकड़े हैं इस सरकार के वो गलत हैं क्योंकि CSO के अगर स्टेटीस्टीक्स देखें तो वो उसकी पुष्टि नहीं करते। लेकिन उसके साथ-साथ इकोनोमी सर्वे में भी मैंने कहा था बजट वाले दिन, जो डाटा दिया है, जिसपर आधारित बजट की प्रोजेक्शन है, वो 8 नवंबर से पहले का है। तो पहले 2 क्वार्टर पर आप निर्भर करते हैं अगले 2 क्वार्टर बहुत खराब होंगे। लेकिन सबसे खराब ये वाला क्वार्टर होगा-  जनवरी, फरवरी, मार्च का और 2017-18 में भारत की इकोनोमी की रिकवरी की कोई उम्मीद नहीं है। क्योंकि ये साल और खराब जाएगा अभी। आने वाला समय उद्योग के लिए और भी कष्टदायक होगा। रोजगार पैदा नहीं हो रहे हैं। इसलिए बजट में जो कहा गया है, वो भी मामूली बढ़त है। अगर आप सही रुप से देखें मनरेगा में, तो उसमें सरकार की तरफ से उदारता नहीं है। उनको मजबूरी में ये करना पड़ा।

 

 नोटबंदी के बारे में जो 4 कारण मुख्य रुप में प्रधानमंत्री जी ने दिए थे वो भी गलत निकले हैं। कालेधन से लड़ाई लड़ने का, भ्रष्टाचार से लड़ाई लड़ने का, नकली नोट को खत्म करना और उसके साथ – साथ टेरर फंडिग को खत्म करना, जो आतंकवादियों के पास पैसा जाता है। 15 लाख करोड़ रुपया जो 86.4 प्रतिशत था वो निकाला गया और रद्द कर दिया प्रधानमंत्री जी ने। उसके बाद से आज की तारीख तक स्थिति सामान्य नहीं हुई। हालांकि वित्त मंत्री जी ने कहा सदन के अंदर, प्रधानमंत्री जी अपने मुँह से ऐसी भाषा का प्रयोग किया जिसके कारण हमारी कई बातें लोगों तक नहीं पहुंच पाई। वित्त मंत्री जी का ये कथन कि एक भी दिन भारत के अंदर नोटबंदी के बाद कैश की कोई कमी नहीं थी। वास्तविकता उसके बिल्कुल विपरीत है, ये पूरा देश और दुनिया जानती है।

 

 एटीएम खाली पड़े और आज भी बंद हैं एटीएम। हिंदुस्तान के ज्यादातर कस्बों के अंदर और इतने बड़े देश के अंदर केवल 2 लाख 12 हजार हैं, उसमें से 40 प्रतिशत तो काम नहीं करते। हमने कहा है प्रधानमंत्री जी से, लेकिन किसी बात का जवाब नहीं देते कि उन्होंने सोच-समझ के फैसला किया या बिना तैयारी के फैसला किया है। कुछ लोग सोच-समझ के भी गलत काम करते हैं, जिसका नुकसान होता है। इससे नुकसान हुआ है। लेकिन वो इंकार करते हैं कि नुकसान हुआ है। वो कहते हैं कि बहुत अच्छा हुआ है। मैं विस्तार से इस पर नहीं जाता, मैं सदन में बता चुका हूं।

 

 एक ही बात कहनी है हमें कि इस प्रजातंत्र में ये पहली चुनी हुई सरकार और प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने लोगों को इतना कष्ट पहुंचाया है और पहले प्रधानमंत्री हैं जो जमीनी हकीकत से इंकार करते हैं। एक ऐसे पद पर आसीन हैं जिसकी गरिमा और जिम्मेवारी को वो नहीं समझ पाए। ये एक बड़ा कारण रहा है सरकार में और प्रतिपक्ष में बार-बार गतिरोध का और मतभेद का। प्रधानमंत्री जी अभी तक ये नहीं समझ पाए हैं कि संसद के अंदर औऱ बाहर आलोचना होती है। राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी विचारधारा होती है, जिसमें विरोधाभास रहता है। इसलिए राजनीतिक विरोधियों को और विरोधी दलों को स्वीकार करना चाहिए प्रजातंत्र के सम्मान में ना कि उसको निजी शत्रुता में परिवर्तित करना चाहिए।

 

 Prime Minister is intolerant to criticism. He lives in denial but he is also arrogant. He has injected bitterness in the political narrative. He has lowered the dignity of his office repeatedly. He has used language which is unacceptable in political debates. He has also dragged political debate to unacceptable low depths. We have been repeatedly urging the Prime Minister to desist from doing this but it is very clear that he actually relishes using foul language, insulting and berating the political opposition.

 

 प्रधानमंत्री जी की मानसिकता टकराव की है, विपक्ष को बदनाम करने की है और राजनीति में तनाव लाने की है। कोई किसी भी विषय पर इन 34 महिनों में कोई पहल नहीं हुई प्रधानमंत्री जी को ओर से। राष्ट्रीय ज्वलंत समस्याओं के बारे में एक आम सहमति और राष्ट्र सहमति बनाएं सब राजनीतिक दलों के नेतृत्व से बात करके। अभिभाषण में शब्द लिखने से परिवर्तन नहीं होता। अभिभाषण में ये लिखकर कि संवाद होना चाहिए, समन्वय होना चाहिए। समन्वय विरोधियों को अपमानित करके, कलंकित करके और अभद्र भाषा का प्रयोग करके कभी नहीं हो सकता।

 

 We are making it clear the manner in which the Prime Minister has conducted his own speeches, the kind of language that he has used and the fact that he has deliberately provoked and targeted the opposition which is unbecoming of a Prime Minister when he calls the opposition parties scam giving an impression as if he and his party alone and alone represent correct values and integrity required in Indian democracy.

 

 We condemn it and we want to make it very clear that we have boycotted the Prime Minister yesterday. We walked out. The Congress Party consciously took this decision because we could not have been sitting there as he was hurling insults and abuses on our leaders former Prime Minister Dr. Manmohan Singh without any provocation from him and in addition to that he insulted the memory of Smt. Indira Gandhi - the martyred Prime Minister of India. He violated the rules of business and the ethics of the House. He breached the privileges of the Members because Dr. Manmohan Singh is the sitting Member as a Special privilege. Prime Minster could not have said anything without giving a notice for and bringing a substantive Motion. We have pointed it out today and this must be understood because I have listened to the BJP President Amit Shah. I have listened to Mr. Venkaiah Naidu. We know what BJP is saying - they are saying we have disrespected the PM. PM has insulted Indian democracy and Parliament and we cannot accept what he has done. I want to make it absolutely clear that Congress Party, yesterday, in Rajya Sabha, conscious of the office of the Prime Minister, not only the person occupying that office, chose to walk-out rather than prevent him from speaking. BJP in the past, go by record, prevented Dr. Manmohan Singh from speaking but we belong to a different ideological and cultural stream. We did not prevent the Prime Minister as he was engaged in vitriolic abuse and misleading the people because what he was saying widely gets covered. He had also made it clear that he will not listen to anybody from Opposition. He will not answer any clarification.

 

 आप में से काफी लोगों को मालूम हैं, जिनको नहीं मालूम है, सरकार की तरफ से परसों ये कह दिया गया था कि विपक्ष को जो कहना है, प्रधानमंत्री जी की गैर-मौजूदगी में मंगलवार शाम तक खत्म कर दें और सरकार की तरफ से एक प्रधानमंत्री जी का फरमान आया था जो बिजनेस ऐडवाईजरी कमेटी में सुनाया गया कि प्रधानमंत्री जी सुबह 11 बजे आएंगे तो सदस्यों का वक्त होता है, 12 बजे प्रश्न-उत्तर समय होता है, हाऊस को वो डिक्टेट कर रहे हैं, चैयरमैन को डिक्टेट कर रहे हैं कि क्या बोलना है और कब खत्म करना है। जब भी कुछ बात होगी हम उसका जवाब नहीं देंगे। ये निंदनीय है। हम ये बात स्पष्ट कर देना चाहते हैं श्री नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री जी से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और समान विचार वाले दलों को कोई संवाद नहीं हो सकता। हम प्रधानमंत्री जी का बहिष्कार इस सत्र में कर रहे हैं, इस आग्रह के साथ कि वो अपने गिरेबान में झांक कर थोड़ा चिंतन करें। अपने शब्दों के लिए खेद व्यक्त करें, माफी वो कभी नहीं मांगेगे क्योंकि उनमें अहंकार है, उनमें विनम्रता और शालीनता नहीं है जो एक प्रधानमंत्री जी के अंदर होनी चाहिए।

 

 Shri Sharma further said Prime Minister does not have humility and has not indicated that he will reflect and correct the course by either withdrawing his words particularly insults to Smt. Indira Gandhi more of a fabrication based upon or to the former Prime Minister and to the entire opposition. I want to also make it very clear to the Prime Minister that there are many books written on Shri Narendra Modi which are available and which if anyone of you is interested the Media Deptt. will make them available but we have neither quoted from the book, he is lying to defend himself but in Parliament respecting the parliamentary tradition, we have not quoted what has been written disparaging the PM and his person. None of the Houses would have done that. If we have said something, that is parliamentary. That shows the difference between the Congress Party and the BJP. So I have said what I had to say about this part of the Budget session.

 

 It is now for the people to judge where the country is heading with this kind of mindset and the kind of lies being peddled. I am not comfortable using this word but I am constrained to do so. If we are told that not even for one day there was a cash shortage, jobs have been created, jobs have not been lost, what we will say, is it true? The answer is No. I cannot even say that they are moving away from truth, what is lie is a lie and Prime Minister does so with aplomb.

 

 वैंकेया नायडू जी के बयान पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में श्री शर्मा ने कहा कि मजाक में प्रधानमंत्री जी को अपनी मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। हम मजाक भी समझते हैं और कटाक्ष भी समझते हैं। वैंकेया नायडू जी का अगर हिंदी का ज्ञान कम है तो उसको दुबारा पढ़ लें।

 

 एक अन्य प्रश्न पर कि क्या आप लोकसभा में भी इसी रणनीति पर काम करेंगे, श्री शर्मा ने कहा कि देखिए जब पार्टी एक कार्डिनेटिड पोजिशन लेगी तो वो सब सदनों में होगा। पार्टी जो तय करेगी - भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दोनों सदनों में अलग-अलग दल नहीं है और दूसरे राजनीतिक दल समाजवादी, कम्यूनिस्ट, जेडीयू, दोनों सदनों में ही राजनीतिक दल हैं हम। हम आपस में बातचीत करके फैसला करेंगे, क्योंकि सबको अपमानित किया।

 

On the question whether the boycott will be for this Session only, Shri Sharma said this session is a long session. The opposition parties will meet in the inter-session period. Now we have gone into recess and we will be coordinating our position very closely. Do not worry; let us meet again on the 9th of March in Parliament. This story which the Prime Minister has scripted, we will be concluding that final chapter will be written by us and Prime Minister must note that. I am making it very clear. He has started the first chapter, we will write the last chapter on this subject.

 

On the question that, whether it was true that the PM has refused to give clarification, Shri Sharma said he has refused. He was sitting in Parliament. If you go by the proceeding of yesterday, last evening, the Chair made categorical announcement twice before the Chair said the debate is inconclusive, and the last speaker is Shri Anand Sharma. It is the tradition that Dy. Leader of Opposition wraps up the debate for the Opposition and the debate is initiated by the LoP – the Leader of Opposition. It is not that the PM and the Government are ignorant and the Chair had announced it on Tuesday evening before adjourning the House. Yesterday when the House reconvened, the first announcement from the Chair was he will resume the debate, then PM will come and it was clear that this is the last Speech on this debate after which the Prime Minister will reply. Please go by record.  Was there any reference that the Finance Minister will intervene? FM's intervention was necessitated because of one reason – that Prime Minister had sent a very clear message even when though he had conveyed to the Chairman or it was conveyed to us that he will be coming to the House at 4.30 pm. He did not come until we sat down but he sent a message that he will only start from his office after the Dy. Leader of Opposition sits down. It is very clear because he is uncomfortable to criticism. Not that I am enamored; what we are saying is fact. We were doing our duty. If there is disrespect and insult, it is coming from his side not from us.

 

Shri Sharma added that we will boycott the PM, we will not listen to him but we will not assault the dignity of the office of the PM. At the same time, we will continue to protest, we know that he is an obdurate person. I have said so, it is sad that we have an arrogant person who occupies the Chair of the Prime Minister. He has demeaned his office repeatedly by his choice of words and language.  

 

On the question of any Privilege Motion, Shri Sharma said already some Members have taken it up and as per the rules, either he has to correct his statement which Ministers are allowed and I hope that the Finance Minister who understands the parliamentary rules and privileges will correct that wrong statement of his.

 

On the prevalent political situation in Tamil Nadu, Shri Sharma said it is for the Government of the day the Prime Minister and the Home Minister who have appointed the Governor to ensure that the Constitutional mandate is respected and the duties discharged as per the Constitutional provisions. That is a short point which I want to make - nothing beyond that because as you know we are in Opposition. If we were in Government, we would have given a detailed response but now we are not required to.

 

On the question of reaction of the Congress Party of BJP making a statement that Shri Rahul Gandhi was sitting by the side of Dr. Manmohan Singh in Uttarakhand, Shri Sharma said when he was sitting alongside, whose memory is wrong. Media has corrected memory. Shri Rahul Gandhi had his issues with the Ordinance but he was not sitting alongside Dr. Manmohan Singh and he never tore the Ordinance.

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