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Press briefing of Shri Manish Tewari 13-2-2017

Created on Monday, February 13, 2017 12:00 AM

https://www.youtube.com/watch?v=CDVPMKrkw4M

Shri Tewari began by saying that the Prime Minister while addressing an election rally in Uttarakhand - a state - which contributes substantially to the Indian Armed Forces said "Attack me if you want, don't ever question the integrity of our Armed Forces.” We would like to tell the Prime Minister of India that nobody has ever questioned the integrity of the Armed Forces but what we have indeed questioned and we would request you to refrain from doing, is using the Armed Forces as a political prop. There is enough empirical evidence which is available in the public space that what the Government characterized Surgical Strikes, what the Government called Operations along the LoC were not the first which were carried out by any Government. Such operations along the LoC happened when the UPA was in Government and it happened before the UPA was in Government.  So, therefore, it is extremely unfortunate and it is highly regrettable that the Prime Minister is using - rather misusing – the Armed Forces as a prop for political and electoral purposes. It is ironic that the Prime Minister's statement comes at a point in time when reports have emerged in the public space that the NDA-BJP Government through the ICCR has decided to sponsor or part sponsor the Karachi Lit Fest.

 

 Now if you step back and  look at the perspective over the past 30 months, the pendulum has swung from 'No talks till terror abates' to 'talking about terror' and finally establishing the contact by using a surreptitious cultural façade. This itself exposes the duplicity, the hypocrisy and the complete lack of a policy towards Pakistan insofar as this Government is concerned. While no one has ever said that people-to-people contact should not be there, it has been repeatedly underscored that we have no enmity or ill-will towards the people of Pakistan. It is the deep state in Pakistan which continues to be inimical to the interest of India but then any such policy needs to be coherently defined, cogently articulated and implemented in a calibrated manner, something which this Government has completely failed to do.

 

 Coupled with this, reports have also emerged that the ISI has ostensibly, according to Law Enforcement structures of the Government, been successful in counterfeiting both the Rs. 500 and Rs. 2000 note. Now, if these assertions are correct which the Government agencies are making, that certain currency notes which have been seized have been and I do not use the word allegedly deliberately since the Government agencies are saying it have been counterfeited by the ISI and where does it leave the Prime Minister's assertions made on the 8th of November 2016 that the objective of demonetization was to proscribe counterfeit currency as well as rein in terror financing?

 

 So, in conclusion, we would just like to underscore and emphasize that the NDA-BJP Government, under Prime Minister Shri Narendra Modi, has made a complete and absolutely hash of national security. National Security is not about securing the interest of the Nation, it is but a mere political football which has to be cynically exploited for electoral purpose.

 

श्री मनीष तिवारी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जी ने उत्तराखंड में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ये बात कही है कि आप मेरे पर प्रहार कर सकते हैं लेकिन जहाँ तक भारत की सेना का सवाल है उसकी निष्ठा या कर्मठता पर किसी को भी सवाल उठाने की इजाजत नहीं है। हम प्रधानमंत्री जी से ये कहना चाहते हैं कि सवाल भारत की सेना की कर्मठता या निष्ठा पर नहीं उठ रहे हैं, उनकी कर्मठता और निष्ठा को लेकर इस देश में दो राय हो ही नहीं सकती। लेकिन प्रश्न इस बात पर उठ रहे हैं कि जिस तरह से आप राजनीतिक कारणों से प्रेरित होकर भारतीय सेना को एक राजनीतिक मोहरे की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं।

 

पिछले चंद महिनों में ये बात सार्वजनिक हुई है। कई पत्रिकाओं ने इसका उल्लेख भी किया है कि जो कार्यवाई जिसे सर्जिकल स्ट्राईक का नाम इस सरकार ने दिया था, वो महज पहली बार नहीं हुई है, इससे पहले भी यूपीए के कार्यकाल में और उससे पहले जो सरकारें थी, उनके कार्यकाल में भी ऐसी कार्यवाही की गई है। लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है कि सेना की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हुई कार्यवाही का किसी सरकार ने राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की है और प्रधानमंत्री जी का ये बयान उस समय आता है जबकि ऐसी खबरें उजागर हुई हैं कि ICCR के माध्यम से सरकार अब पाकिस्तान के कराची शहर में जो सांस्कृतिक कार्यक्रम होता है उसको प्रायोजित कर रही है या पार्ट- स्पोन्सर कर रही है। अब एक बुनियादी सवाल उत्पन्न होता है कि पिछले 30 महिनों में कभी सरकार ये कहती है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकती, कभी ऊफा में ये कहते हैं कि हम बातचीत आंतकवाद के ऊपर करेंगे और अब जब उरी के बाद या उसके बाद जो आतंकी घटनाएं हुई हैं, पाकिस्तान के नजरीए में कोई बदलाव ना आने के बावजूद एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से पाकिस्तान से फिर बातचीत करने का एक जरिया खोजा जा रहा है।

 

इसे अगर एक और संदर्भ में देखें कि एक तरफ तो सरकार कराची में सांस्कृतिक कार्यक्रम को स्पोन्सर करती है और दूसरी तरफ जो सरकार के तंत्र है, सरकार की ऐजेंसिया हैं वो ये कह रही हैं कि जो 500 और 2000 के खूफिया नोट पकड़े गए हैं पिछले दिनों में उनको छापने में ISI का हाथ है। अगर ये सही है तो सरकार की नीति और नियत में, जो विरोधाभास है इसको प्रधानमंत्री जी को देश के समक्ष रखना चाहिए और साथ-साथ इस बात का भी उल्लेख करना चाहिए कि नोटबंदी, नोटबदली के दो महिने के बाद ISI ने 500 और 2000 के नोट छापने शुरु कर दिए हैं। तो जो उन्होंने देश से वायदा किया था, जब ये सारा नोटबदली का कार्यक्रम चलाया था कि इसका लक्ष्य ये है कि फर्जी नोटों को रोका जाए, जो आतंकवादियों को माली सहायता मिलती है, उस पर रोक लगाई जाए, वो लक्ष्य कहाँ तक पूरे हुए

अंत में सरकार की जो नियत और नीति रही है उससे एक बात साफ उजागर होती है कि ना तो पाकिस्तान के प्रति इनकी कोई दिशा या दृष्टि है और जहाँ तक राष्ट्रीय सुरक्षा का संबंध है, इनको राष्ट्र की सुरक्षा से कोई लगाव नहीं है लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा का किस तरह से राजनीतिक फायदा लिया जाए उसमें दिलचस्पी है।

उत्तर प्रदेश चुनाव में एक सपा प्रत्याशी के विधायक हत्या के आरोप लगे होने को  लेकर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में श्री तिवारी ने कहा कि हमारा निरंतर और लगातार यही मशवरा रहा है कि फौजदारी के मामले में कानून को अपना काम करना चाहिए और निष्पक्षता से कानून को अपना काम करना चाहिए।

एक अन्य प्रश्न पर कि क्या प्रियंका गाँधी जी उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार करेंगी, श्री तिवारी ने कहा कि जहाँ तक प्रचार की रणनीति का सवाल है उससे जुड़े हुए जितने सवाल हैं उनका बेहतर जवाब श्री गुलाम नबी आजाद जो प्रभारी महासचिव हैं और जो उत्तर प्रदेश का चुनाव देख रहे हैं, वो इसका बेहतर जवाब दे पाएंगे।

 

एक अन्य प्रश्न पर कि एक्जिट पोल के माध्यम से उत्तर प्रदेश चुनाव को प्रभावित करने का मामला सामने आया है, चुनाव आयोग ने इसपर एक्शन लिया है, क्या कहेंगे, श्री तिवारी ने कहा कि दो अलग-अलग सवाल हैं। पहला कि चुनाव आयोग ने इसका Sou moto cognizance लिया है और उन्होंने निर्देश दिया है कि जो फौजदारी का  कानून है उसके तहत कार्यवाही की जाए। इसका हम स्वागत करते हैं। दूसरा जो बुनियादी सवाल है और एक बहुत ही अच्छा लेख एक अखबार में भारत के मीडिया को लेकर मुकुल केसवन ने लिखा है जो पढ़ने लायक है। ऐसा कौन –सा आंतक है जो भारत के अखबार के मालिक हैं उनके सर के ऊपर मंडरा रहा है कि सरकार को खुश करने के लिए वो सरकार के सामने घुटने टेकने को तैयार हैं? ये सिर्फ एक एक्जिट पोल का सवाल नहीं हैं, ऐसा तो नहीं कि जिस अखबार ने ऐसा किया है उनको चुनाव आयोग के जो नियम-कानून हैं और चुनाव के एक्जिट पोल की मर्यादा की जानकारी नहीं है, तो इसके बावजूद अगर ऐसा हुआ है तो इस बात के उपर चिंता, गौर और आत्मनिरीक्षण करने की जरुरत है कि सरकार की तरफ से जो मीडिया के प्रोपराईटर हैं, इस तरह का दबाव क्यों बनाया जा रहा है। ये बुनियादी सवाल है।

 

किरण रिजूजी के बयान पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में श्री तिवारी ने कहा कि गृहमंत्रालय में जो राज्यमंत्री हैं या तो उनको तथ्य नहीं मालूम हैं या जो जानबूझ कर चुनाव को मद्देनजर रखते हुए इस देश में एक धार्मिक ध्रुविकरण करने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि जो 2011 का जो सेंसस डेटा है, जिसका उल्लेख मैंने अभी किया है उसके हिसाब से जो हिंदुओं की जनसंख्या है, वो कोई इतनी कम नहीं हुई है -80 प्रतिशत के लगभग है कि इस तरह की किसी को चिंता होनी चाहिए और सेंसस यहाँ तक कहता है कि जो बाकि धर्म है उनका जो जनसंख्या का ग्रोथ रेट है जो मेजोरिटी है उससे कहीं ज्यादा गिरा है। तो इसलिए जब सरकार के एक मंत्री की तरफ से ये बयान आता है और जिस मंत्रालय की निगरानी में जो रजिस्ट्रार ऑफ सेंसस है वो काम करता है, तो इसके दो ही मतलब हो सकते हैं। पहला या तो मंत्री जी को तथ्यों का ज्ञान नहीं है और अगर ज्ञान है तो जानबूझ कर इस देश में धार्मिक ध्रुविकरण करना चाह रहे हैं, उसका राजनीतिक फायदा लेना चाह रहे हैं और इस बयान को चुनाव आयोग को बहुत गंभीरता से लेने की जरुरत है।

 

 On the question of the controversial statement of by Shri Rijiju, Shri Tewari said the statement which has been made by the Minister of State for Home Affairs or the tweet that he put out, was not limited to Arunachal Pradesh,. If you read that tweet, the intent is implicit in it but the fact remains that when a Minister of the Union makes such an irresponsible statement, he must be held to account.  It is not surprising if the Prime Minister can use the National security as a prop. There is nothing which stops his Ministers from going a step further and trying to attempt a religious polarization. It smacks of desperation, it smacks of the fact that they have lost the plot and it smacks of the fact that for all the tall talk about development, ultimately the BJP comes back to its basic DNA and that basic DNA is to try and garner electoral benefit out of religious polarization.

 

Suddenly one fine day you wake up in the morning and shoot from the hip, this is the conduct which is unbecoming of a Minister. So, the only thing which seems to be decreasing, is the intellectual quotient of the NDA-BJP Ministers.

 
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