श्री अजय माकन ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा की पिछले लगभग 10 दिनों के अदंर एक के बाद एक बहुत ही विचित्र घटनाएं हम लोगों को देखने को मिली।

श्री अजय माकन ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा की पिछले लगभग 10 दिनों के अदंर एक के बाद एक बहुत ही विचित्र घटनाएं हम लोगों को देखने को मिली। भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी दोनों ने जनता से बड़े बड़े वादे किए, बड़े बड़े सपने दिखा कर और पारदर्शी सरकार और ईमानदार सरकार की दुहाई देकर सत्ता में आई।

 

पिछले 10 दिनों में हमने देखा कि दिल्ली के कानून मंत्री की डिग्री फर्जी है और अब य़ह देखने को आ रहा है कि भारत सरकार की एजूकेशन मिनीस्टर की एजूकेशन डिग्री पर भी प्रशनचिन्ह कोर्ट ने लगा दिया, आज पटियाला हाउस के अंदर कोर्ट ने श्रीमती स्मृती ईरानी, जो की देश की एजूकेशन मिनीस्टर हैं उनके खिलाफ दायर याचिका को जायज ठहराया है, उसको अनुरक्षणीय माना है।

 

इसलिए कोर्ट ने उनके खिलाफ याचिका को आगे की कार्यवाई के लिए रख दिया है जिसमें आगे ट्रायल कोर्ट के अंदर होगा। मैं दोहराना चाहुंगा की आपको याद होगा कि जिस दिन नरेंद्र मोदी जी ने कैबिनेट बनाई थी, उसी दिन शाम को आप लोगों के साथ मैंने औपचारिक और अनौपचारिक बातचीत के अंदर इस बात को उठाया था, उनके द्वारा दिए गए एफिडेविट अलग- अलग थे, जो उन्होंने अपनी एजूकेशन क्वालिफिकेशन के बारे में दिए हैं, उसको हमने उस वक्त उठाया था।

 

मैं यह दोहराना चाहुंगा कि अप्रैल 2004 के चुनावों में स्मृती ईरानी ने यह कहा था कि, उन्होंने उनकी बेचलर ऑफ आर्टस, 1996 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्कूल ऑफ कोरस्पोन्डेन्ट से किया। उसके बाद 2011 के राज्यसभा के प्रस्तावों में, एफिडेविट में यह बेचलर ऑफ आर्टस 1996 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्कूल ऑफ कोरस्पोन्डेन्ट बन जाता है बी.कॉम पार्ट वन

 

उसके बाद में 2014 के अंदर फिर यह आगे बदल जाता है, यह बन जाता है बी.कॉम पार्ट वन 1994 में स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग दिल्ली यूनिवर्सिटी।

 

तो पहले उन्होंने कहा की बीए 1996 में किया, फिर कहा कि बी.कॉम पार्ट वन दिल्ली यूनिवर्सीटी से स्कूल ऑफ कोरस्पोन्डेन्ट से किया, फिर उन्होंने कहा कि बी.कॉम पार्ट वन 1994 में स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग दिल्ली यूनिवर्सिटी से किया। तो यह बहुत गंभीर अनियमितता है एफिडेविट में जिसको लोग बहुत गंभीर मानते हैं चुनावों के समय में। लिहाजा कोर्ट ने आदेश दिया है इसका ट्रायल शुरु होगा, इसकी जांच होगी।

अब प्रशन यह उठता है की क्या यह जायज है की हमारे देश कि एजूकेशन मिनीस्टर की एजूकेशन के बारे में जब कोर्ट जांच कर रही है और दिल्ली यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार से जब यह पूछा जाएगा कि आप बताएं कि इनकी क्वालिफिकेशन के बारे में क्या सत्य है क्या असत्य हैतो उस वक्त अगर एजूकेशन मिनीस्टर स्मृती ईरानी ही रहती हैं तो क्या यह कनफलिक्ट ऑफ इनट्रस्ट नहीं हैक्या कनफलिक्ट ऑफ इनट्रस्ट होने के साथ-साथ स्मृती ईरानी उस जांच को प्रभावित नहीं कर पाएंगी?

 

इसलिए हम लोगों की यह मांग है की स्मृती ईरानी को तत्काल प्रभाव से उनके पद्द से हटाया जाना चाहिए।

इसी तरह से हमने देखा कि दिल्ली के कानून मंत्री जितेंद्र तोमर को जब बॉर काउंसिल ने हटाने के लिए उनकी शिकायत को पुलिस को इनवेस्टिगेट करने के लिए फॉरवर्ड किया तो अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी उनको बचाने के लिए लग गई। लिहाजा क्या हुआ, एक महीने के अंदर-अंदर जितेंद्र तोमर जी खुद के हस्ताक्षर से पब्लिक प्रोसिक्यूटर और स्टेंड़िंग कॉउंसल अपोयंट हो गए।

 

जनता का वकील जो जितेंद्र तोमर के हस्ताक्षर से अपोयंट हुआ है, जब कोर्ट में जा करके जनता की बात करेगा तो हम कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि वो सही न्याय की बात करेगा?

 

 

ठीक उसी तरीके से अब अगर श्रीमती स्मृती ईरानी एजूकेशन मिनीस्टर रहती हैं उनके उपर जांच दिल्ली यूनिवर्सीटी से होती है, तो हम कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि एजूकेशन मिनीस्टर के दवाब में अधिकारी कार्य नहीं करेंगे?इसलिए कनफलिक्ट ऑफ इनट्रस्ट बहुत गंभीर है, हम मांग करते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी जी को एक्शन लेकर तत्काल प्रभाव से उनका इस्तीफा लेना चाहिए।

 

दूसरा मुद्दा महाराष्ट्र का है जो चाइल्ड़ डवल्पमेंट मिनीस्टर पंकजा मुंडे से जुड़ा है। यह पता चला है कि 13 फरवरी 2015 को एक ही दिन में 206 करोड़ रुपए 24 गर्वमेंट रेजोलूशन पास करके ठेका दे दिया गया और उसके लिए कोई भी पब्लिक टैंड़र पास नहीं किए गए। महाराष्ट्र में जबकि यह कानून है कि 3 लाख से उपर अगर कोई भी कीमत का सामान अगर सरकार को लेना है तो उसके लिए ई-टैंड़र जरुरी है। लेकिन इन सब चीजों को बाई पास करके 206 करोड़ के ऑर्ड़र दिए गए 24 गर्वमेंट रेजोलूशन के माध्यम से बगैर कोई ई-टैंड़र के जारी किए।

 

एक एन.जी.ओ जिसको 2013 में रिजेक्ट कर दिया गया था उस प्रतिबंधित एन.जी.ओ को वो कार्य दिया गया, कीमत भी बढ़ा चढ़ा कर बताई गई थी, जिससे इस इनवेस्टीगेशन की शुरुआत हुई। लोगों को जो खाना बांटा जाता था वो भी प्रदूषित था। एक तरफ तो बच्चों को प्रदूषित खाना दिया गया, दूसरी तरफ कीमत भी बढ़ा चढ़ा कर दी गई, तीसरा प्रतिबंधित एन.जी.ओ को कार्य दिया गया। सरकार के किसी भी रेजोलूशन को नहीं माना गया। कोई भी रेजोलूशन नहीं माना गया। 3 लाख से उपर के ई-टैंड़र ऑर्ड़र गर्वमेंट रेजोलूशन के माध्याम से दे दिए गए। यह अपने आप में बहुत बड़ा स्कैम है।

 

हम लोग यह मांग करते हैं कि इसके लिए एक ज्यूडिशियल इंक्वारी होनी चाहिए सिटिंग हाई कोर्ट जज के द्वारा और तभी इस जांच कि तह तक पहुंचा जा सकता है। इसके लिए सीटिंग हाई कोर्ट जज के द्वारा इन्कवाईरी कि कांग्रेस पार्टी मांग करती है।

 

इसके अदंर देवेन्द्र फडनवीस जो मुख्यमंत्री हैं वो भी इस जांच से बच नहीं सकते क्योंकि सब चीजें इनकी नाक के नीचे, इनकी अपनी देख रेख में हुई है। तो इसके अंदर जो कनसर्न मंत्री है उसको भी हटाया जाना चाहिए। इसकी ज्यूडिशियल जांच होनी चाहिए हाई कोर्ट जज के द्वारा, कांग्रेस पार्टी यह मांग करती है।

 

एक प्रशन बीजेपी ने कहा है की सोनिया गांधी के मामले में भी ऐसा ही कनफ्यूजन हुआ था। सुप्रिम कोर्ट ने कहा थी कि यह एक टाईपिंग एरर था। कांग्रेस इस मामले में क्या कहेगीजवाब देते हुए अजय माकन जी ने कहा की 2005 में सुप्रिम कोर्ट में सुभ्रयमण्यम स्वामी ने जो याचिका दायर कि थी , सुप्रिम कोर्ट ने कहा कि उस पर कोई केस नहीं बनता। उसके अंदर अब फर्क यह है की जब एजूकेशन मनीस्टर स्मृती ईरानी ही रहती है, जब उनके अधीन आने वाली दिल्ली यूनिवर्सीटी के रजिस्टार या दिल्ली के किसी भी अधिकारी से जब असलियत पूछी जाएगी तो कनफलिक्ट ऑफ इनट्रस्ट को और जांच को प्रभावित नहीं करेगा? जांच का दायरा उनके अधीन आने वाली दिल्ली यूनिवर्सीटी से होगी तो हम कैसे मान सकते हैं कि वो न्याय पूर्ण होगी?

 

एक अन्य प्रशन राजनाथ सिंह जी ने कहा है कि किसी भी मंत्री का इस्तीफा नहीं लिया जाएगा चाहे वो सुषमा स्वराज जी हों या स्मृती ईरानी जी हों।

 

यूपीए सरकार और एनडीए सरकार में फर्क दिखना शुरु हो गया है। इसके अंदर क्लीयर कट चाहे वो सुषमा स्वराज जी वाले मसले पर हो य स्मृती ईरानी जी वाले मसले पर हो तो जब  क्लीयर कट सारी बातें सामने आ रही हैं तब भी यह सब के सब उस मसले पर कार्यवाई नहीं करना चाह रहे हैं। तो यह फर्क यूपीए सरकार और एनडीए सरकार में स्वतही दिखना शुरु हो गया है।

 

दूसरा हम यह कहना चाहते हैं की कांग्रेस पार्टी इनके इस्तीफे कि मांग को लेकर के पार्लियामेंट के अंदर और बाहर संघर्ष करेंगे और कल जंतर-मंतर पर 12 बजे बड़ा प्रदर्शन कांग्रेस पार्टी कि तरफ से स्मृती ईरानी जी के इस्तीफे को लेकर के हम लोगों ने आयोजन किया है।

 

एक अन्य सवाल शीला दीक्षित सरकार पर टैंकर घोटाले के आरोप हैं इस पर आपका क्या कहना हैजवाब देते हुए अजय माकन जी ने कहा की आज शीला दीक्षित जी ने बयान दिया है जिस बोर्ड़ ने यह निर्णय लिया है उसके अंदर सब पार्टीयों और दूसरी पार्टीयों के भी मैंबर होते हैं, कार्पोरशेन से भी, दूसरी राजनीतिक पार्टीयों के भी मैंबर होते हैं तो यह निर्णय उसमें हुआ है और किसी भी प्रकार कि जांच के लिए हम तैयार हैं और हम किसी भी प्रकार की जांच से नहीं भाग रहे हैं।

 

एक अन्य सवाल कल ललित मोदी ने अदालत में डाक्यूमेंट् दिए हैं जिसमें उन्होंने सीधे-सीधे अड़ानी, मादी एंवम और भी नेताओं का नाम लिया है, क्या ललित मोदी यह सब जांच से बचने के लिए कर रहे हैंजवाब देते हुए अजय माकन ने कहा की देखिए हमारा शुरु से ही यह मानना है कि इस पूरे प्रकरण के लिए क्योंकि मामला गहराता जा रहा है इसके लिए एसआईटी होनी चाहिए। विशेष जांच इसके लिए होनी चाहिए। इसके अंदर वसुंधरा राजे से लेकर के, अड़ानी से लेकर के, अमित शाह से लेकर के, नरेंद्र मोदी से लेकर के, अरुण जेटली से लेकर के कितने ही नेताओं के नाम निकल कर आ रहे हैं तो इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच होनी चाहिए और  कांग्रेस पार्टी ने निरंतर इसके लिए मागं कि है।

 

एक अन्य सवाल स्मृती ईरानी का केस जो आया है, उसमें भी जितेंद्र तोमर की तरह ही एफआईआर दर्ज होगी क्या उन्ही की तरह स्मृती ईरानी के केस में भी एक्शन लिया जाएग? क्या आप  स्मृती ईरानी के केस में भी इस तरह कि मांग करेंगे? जवाब देते हुए अजय माकन ने कहा बिल्कुल कोर्ट ने इस केस को स्वीकार किया है  तो दिल्ली पुलिस को तुरंत इसमें एफआईआर दर्ज करनी चाहिए और कार्यवाई करनी चाहिए। इसी मांग को लेकर के हम कल पार्लियामेंट के अंदर और बाहर संघर्ष करेंगे और कल जंतर-मंतर पर 12 बजे बड़ा प्रदर्शन कांग्रेस पार्टी कि तरफ से स्मृती ईरानी जी के इस्तीफे को लेकर के हम लोगों ने आयोजन किया है।

 

Shri V. Narayansamy, In-charge of North East States said that in the seven states of North Eastern State, the Congress party is in power Mizoram, Manipur Meghlaya and Arunachal Pradesh. In 2014 when NDA Government came to power, they have been targeting the Congress-ruled States in the North East by cutting the centrally sponsored schemes in which the share of North Eastern States was 10% by the State Government and 90% by the Central Government. This has been there for a long time and continued during UPA regime because the North Eastern States have to be developed.

 

Now, when the NDA Government came to power, they cut it to 50:50 whether it is Sarva Shiksha Abhiyan, Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana, MNREGA or National Rural Health Mission. Therefore, the North Eastern States are starving for funds. It is not only in the Congress-ruled States but also in CPM ruled Tripura and in Nagaland. Therefore, those Governments are also suffering.

 

Secondly, under the 14th Finance Commission, they are trying to remove the Special Category Status for the North Eastern States but also for J&K, Himachal Pradesh, Jharkhand and Uttarakhand. Since infrastructure has to be developed, Education has to be given in a better manner, Health needs to be provided, Water supply has to be provided and small industries have to come up in the North Eastern Region, the earlier UPA Government has given 90% Grant in the Budget and 10% the State Government resources mobilization.

 

The NDA Government is now trying to cut it to 30% by the Government of India and 70% by way of mobilization by the State Government. This is creating problem for the over-all development of North Eastern Region. The CMs of the North Eastern States and the States which have been enjoying the Special Category Status wanted appointment jointly with Hon’ble PM. So far, for the last two months, the Prime Minister Shri Narendra Modi has not given them the appointment. This clearly shows that North Eastern States have been ignored. They have been side-lined by the Prime Minister Shri Narendra Modi and the NDA Government.

 

Now, new political developments are starting in the North East. The Naga Peace talks which had continued during the UPA regime. When the NDA came to power, the NSCN-K pulled out of Peace Talks because of the partisan attitude of the Home Ministry and the NDA Government. They have been trying to divide this terrorist group in the name of the divide and rule policy. Because of this, tension is prevailing in Nagaland, Manipur, Arunachal Pradesh and other States.

 

In Manipur 178 jawans were killed by the NSCN-K and about 8 jawans were killed in Nagaland and 3 jawans were killed in Arunachal Pradesh. As per the report which we have been getting from Nagaland, the children of Army men are unable to go to school in Nagaland. Tension is prevailing there. This is the handiwork of the Home Ministry and the NDA Government. They are trying to disturb peace in the North Eastern Region. The Prime Minister gave an assurance to the people that in the North East, within 18 months, he will complete the Naga Peace talks. So far not even an inch has moved. The interlocutor who has been appointed showed his displeasure to the Prime Minister that the Home Ministry is not properly handling the Naga Peace talks. Some terrorist outfits are trying to destabilize our Congress Governments in the North East. They have tried in other States and could not succeed but in Arunachal Pradesh Shri Kiran Rijiju, MOS for Home is directly involved. It is his Home State. He is involved in disturbing and destabilizing duly democratically elected Congress Government in Arunachal Pradesh whereas the Prime Minister is talking of the political and moral values.

 

Prime Minister is talking about the co-operative federalism but today it has become a dictatorship on the part of Shri Narendra Modi Government in trying to disturb the democratically elected Governments in the North East. Arunachal Pradesh MLAs are being threatened by the terrorist outfits and they have been told to resign from the Congress Membership. This has been used by the power in Delhi, the Home Ministry is involved, MOS for Home is involved, directly the President of the BJP Shri Amit Shah is involved in this. This is a very grave situation and it is very unfortunate that in the name of democracy and co-operative federalism, the Narendra Modi Government is trying to destabilize the Congress Governments and they are trying to demolish the moral values in this country. Our Congress CMs will fight collectively against the sinister design of the NDA Government. Therefore, we will raise it in the Parliament; we will raise it outside the Parliament and with all our might, will oppose the move of the present NDA Government and their sinister designs to destabilize our Congress Governments in the North Eastern States.

 

To a question whether the Spokesperson was only talking of Arunachal Pradesh, Shri Narayansamy said they have played mischief with Nagaland and 8 Congress MLAs have joined their Government. This is a very clear case of disturbing our Congress MLAs. In Manipur, in local elections, Congress party candidates are not allowed to file their nominations. Terror outfits have been misused. There are cases where we will expose the NDA Government and the direct involvement of MOS Home Shri Kiran Rijiju and Shri Amit Shah.

 

To another question that some terror outfits have close links with the MOS Home, Shri Narayansamy said better ask the NSCN-K, they will tell you. He further said in providing tacit support to the terrorist group, the Home Ministry is involved and Shri Kiran Rijiju is trying to destabilize the Arunachal Pradesh Government. He said very clearly that NSCN-K broke out from the talks because of the statement given by the MOS for Home that they do not want to talk to NSCN-K. He was the root cause for NSCN-K going out of the Peace Talks.

 

To a question that Lalit Modi had unleashed a wave of tweets in which he has also sought to go on the Congress leaders and asked them to come clean, Shri Maken said this is why I am saying that there should be a thorough probe by SIT and this entire episode needs to be properly enquired into and anyone who is found guilty, from whichever party he belongs to, action should be taken against them.

 

To a question that Parliamentary Standing Committee attached to the Sports Ministry gave a report in 2011 on IPL where serious lapses were reported, Shri Maken said everything is contained in the paper delivered to the media by e-mail earlier.

 

एक प्रश्न पर कि बीजेपी ने कहा है की सोनिया गांधी के मामले में भी ऐसा ही कनफ्यूजन हुआ था। सुप्रिम कोर्ट ने कहा कि यह एक टाईपिंग एरर था। कांग्रेस इस मामले में क्या कहेगीजवाब देते हुए अजय माकन जी कहा की 2005 में सुप्रिम कोर्ट में सुब्रयमण्यम स्वामी ने जो याचिका दायर की थी , सुप्रिम कोर्ट ने कहा कि उस पर कोई केस नहीं बनता। उसके अंदर अब फर्क यह है कि जब एजूकेशन मिनीस्टर स्मृती ईरानी ही रहती हैं, जब उनके अधीन आने वाली दिल्ली यूनिवर्सिटी के रजिस्टार या दिल्ली के किसी भी अधिकारी से जब असलियत पूछी जाएगी तो कनफलिक्ट ऑफ इनट्रस्ट को और जांच को प्रभावित नहीं करेगा? जांच का दायरा उनके अधीन आने वाली दिल्ली यूनिवर्सिटी से होगा तो हम कैसे मान सकते हैं कि वो न्याय पूर्ण होगा?

 

एक अन्य प्रश्न राजनाथ सिंह जी ने कहा है कि किसी भी मंत्री का इस्तीफा नहीं लिया जाएगा चाहे वो सुषमा स्वराज जी हों या स्मृती ईरानी जी हों। जवाब देते हुए अजय माकन ने कहा यूपीए सरकार और एनडीए सरकार में फर्क दिखना शुरु हो गया है। इसके अंदर क्लीयर कट चाहे वो सुषमा स्वराज जी वाले मसले पर हो या स्मृती ईरानी जी वाले मसले पर हो, तो जब  क्लीयर कट सारी बातें सामने आ रही हैं, तब भी यह सब के सब उस मसले पर कार्यवाई नहीं करना चाह रहे हैं। तो यह फर्क यूपीए सरकार और एनडीए सरकार में स्वतही दिखना शुरु हो गया है।

 

दूसरा हम यह कहना चाहते हैं की कांग्रेस पार्टी इनके इस्तीफे कि मांग को लेकर पार्लियामेंट के अंदर और बाहर संघर्ष करेंगे और कल जंतर-मंतर पर 12 बजे बड़ा प्रदर्शन कांग्रेस पार्टी की तरफ से स्मृती ईरानी जी के इस्तीफे को लेकर के हम लोगों ने आयोजन किया है।

 

एक अन्य प्रश्न शीला दीक्षित सरकार पर टैंकर घोटाले के आरोप हैं, इस पर आपका क्या कहना हैजवाब देते हुए अजय माकन जी ने कहा की आज शीला दीक्षित जी ने बयान दिया है, जिस बोर्ड़ ने यह निर्णय लिया है उसके अंदर सब पार्टीयों और दूसरी पार्टीयों के भी मैंबर होते हैं, कारपोरेशन से भी दूसरी राजनीतिक पार्टीयों के भी मैंबर होते हैं तो यह निर्णय उसमें हुआ है और किसी भी प्रकार कि जांच के लिए हम तैयार हैं और हम किसी भी प्रकार की जांच से नहीं भाग रहे हैं।

 

एक अन्य प्रश्न पर कि कल ललित मोदी ने अदालत में डाक्यूमेंट् दिए हैं जिसमें उन्होंने सीधे-सीधे अड़ानी, मोदी एंवम और भी नेताओं का नाम लिया है, क्या ललित मोदी यह सब जांच से बचने के लिए कर रहे हैंजवाब देते हुए अजय माकन ने कहा की देखिए हमारा शुरु से ही यह मानना है इस पूरे प्रकरण के लिए क्योंकि मामला गहराता जा रहा है, इसके लिए एसआईटी होनी चाहिए, विशेष जांच इसके लिए होनी चाहिए। इसके अंदर वसुंधरा राजे से लेकर के, अड़ानी से लेकर के, अमित शाह से लेकर के, नरेंद्र मोदी से लेकर के, अरुण जेटली से लेकर के कितने ही नेताओं के नाम निकल कर आ रहे हैं, तो इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच होनी चाहिए और  कांग्रेस पार्टी ने निरंतर इसके लिए मागं की है।

 

एक अन्य प्रश्न कि स्मृती ईरानी का केस जो आया है क्या उसमें भी जितेंद्र तोमर की तरह ही एफआईआर दर्ज होगी, क्या उन्ही की तरह स्मृती ईरानी के केस में भी एक्शन लिया जाएग? क्या आप  स्मृती ईरानी के केस में भी इस तरह कि मांग करेंगे? जवाब देते हुए अजय माकन ने कहा बिल्कुल, कोर्ट ने इस केस को स्वीकार किया है। दिल्ली पुलिस को तुरंत इसमें एफआईआर दर्ज करनी चाहिए और कार्यवाई करनी चाहिए। इसी मांग को लेकर के हम कल पार्लियामेंट के अंदर और बाहर संघर्ष करेंगे और कल जंतर-मंतर पर 12 बजे बड़ा प्रदर्शन कांग्रेस पार्टी कि तरफ से स्मृती ईरानी जी के इस्तीफे को लेकर के हम लोगों ने आयोजन किया है।

 

 

   

 

Sd/-

(S.V. Ramani)

Secretary

Communication Department