Restoring CBI Director, Alok Verma's full Authority and Tenure - Highlights of the press briefing by Shri Anand Sharma, Senior Spokesperson AICC

Restoring CBI Director, Alok Verma's full Authority and Tenure - Highlights of the press briefing by Shri Anand Sharma, Senior Spokesperson AICC




ALL INDIA CONGRESS COMMITTEE

24, AKBAR ROAD, NEW DELHI

COMMUNICATION DEPARTMENT


Highlights of the Press Briefing: 10 January,2018


Shri Anand Sharma, MP,  Senior Spokesperson AICC and former Union Minister addressed the media today at AICC Hdqrs.


श्री आनंद शर्मा ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि सीबीआई से संबंधित पिछले दो दिनों का घटनाक्रम एक विशेष टिप्पणी की मांग करता है। 23 और 24 अक्टूबर को मध्यरात्रि में जो सरकार ने किया था, सीवीसी के कहने पर सीबीआई के डायरेक्टर को उनके पद से हटाना, छुट्टी पर भेजना, वो गैर-कानूनी था, असंवैधानिक था। उस मध्यरात्रि की घटना की कई बातें हैं, जो पूरी तरह से अभी भी उजागर नहीं हुई हैं, जिस पर गंभीरता से जांच आवश्यक है। 


माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में ये स्पष्ट किया है कि सरकार का वो फैसला गलत था और सीबीआई के डायरेक्टर को पुनअपने पद पर बहाल किया। सरकार का वो निर्णय सीवीसी की सिफारिश पर आधारित था। सीवीसी को भी ये अधिकार नहीं है कि वो सीबीआई के डायरेक्टर को नियुक्त करे, उनको पद से हटाए या उनका तबादला करे। ना ही दिल्ली पुलिस स्पेशल एस्टैब्लिशमैंट एक्ट (Delhi Police Special Establishment Act) में ऐसा कोई अधिकार किसी को दिया गया है और अब जो हाई लेवल कमेटी बनी है, जो सीबीआई डायरेक्टर की नियुक्ति करती है, उसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं, विपक्ष के नेता उसमें हैं और भारत के मुख्य न्यायाधीश हैं। सीवीसी एक्ट भी जिन्होंने पढ़ा है, उनको भी मालूम है कि सीवीसी को कोई अधिकार नहीं है। 


प्रश्न ये है कि कल ही सीबीआई के डॉयरेक्टर वापस अपने कार्यालय जाते हैं और प्रधानमंत्री की घबराहट, बौखलाहट इससे स्पष्ट नजर आती है कि कल ही वो हाई लेवल कमेटी की बैठक बुला लेते हैं। क्या कारण था? कौन सी ऐसी वजह है कि वो प्रधानमंत्री, जिनको कोई चिंता नहीं जब संसद के अंदर महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होती है, परसों और कल जो लोकसभा और राज्यसभा में भी हुई, प्रधानमंत्री सदन में बोलते नहीं, सदन में जो प्रधानमंत्री जी से सवाल पूछे जाते हैं, उसका जवाब नहीं देते हैं। पर अब चंद घंटों के अंदर मीटिंग बुलाते हैं, पहले तो जो सीबीआई के डायरेक्टर हैं, उनके कानूनी अधिकार भी हैं, अगर कोई भी सीवीसी की रिपोर्ट है, उनको दी जानी चाहिए, कमेटी के दोनों सदस्यों को, मुख्य न्यायाधीश के प्रतिनिधी कल थे, अदालत को मालूम है कि क्या रिपोर्ट है, पर विपक्ष के नेता, हम तो वही कहेंगे, चाहे इन्होंने खड़गे जी को माना या नहीं, पर प्रमुख दल के नेता वही हैं, सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता वही हैं, उनको पहले रिपोर्ट दी जानी चाहिए। वो उसको पढ़ें, देखें और उसके बाद सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा जी को उस पर अपनी प्रतिक्रिया देने का पूरा अवसर मिलना चाहिए, समय मिलना चाहिए। कोई कारण नहीं है कि अब उनके बहाल होने के बाद प्रधानमंत्री जी की तरफ से या सरकार की तरफ से कोई भी बाधा उनके काम करने में डाली जाए। ये न्यायोचित होगा कि वो 77 दिन, जब सीबीआई के डॉयरेक्टर को एक गलत फैसले से, जिसका कोई अधिकार नहीं था कानून में, उनको छुट्टी पर भेजा गया, वो 77 दिन इनको वापस दिए जाने चाहिए, क्योंकि सीबीआई के डॉयरेक्टर का दो साल का फिक्स टेन्योर है। हम किसी व्यक्ति की बात नहीं कर रहे हैं, एक संस्था की विश्वसनीयता, प्रमाणिकता की, निष्पक्षता की बात कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी और बीजेपी की सरकार ने सीबीआई को एक संस्था के रुप में पूर्ण रुप से कमजोर करने और बर्बाद करने का काम किया, जिससे सीबीआई की अपनी विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लग चुका है। उसके बाद अब हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं होना चाहिए, सर्वोच्च न्यायालय को भी इस पर गौर करना चाहिए। जाहिर है कि प्रधानमंत्री जी और सरकार इनके सक्सेसर का भी और इनके बाद कौन डॉयरेक्टर बनेंगे, उसके लिए भी तुरंत ही काम करना चाहते हैं और उसका पैनल कौन बनाता है - जो 4 बैचेज लिए जाते हैं, सीनियर मोस्ट ऑफिसर के, वो सीवीसी पैनल बनाता है, गृह मंत्रालय के साथ समन्वय करके, चर्चा करके, गृह मंत्रालय नाम भेजता है। जो सीवीसी खुद ही अब शक के दायरे में आ चुके हैं, जिस सीवीसी को नैतिकता के आधार पर परसों ही अपने पद को छोड़ देना चाहिए था, जब सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आ गया तो सीवीसी को कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि उनकी जवाबदेही सीधी बनती है। सीवीसी से ये अपेक्षा की जाती है कि देश में सतर्कता का काम निष्पक्ष तरीके से करेंगे, केवल सरकार के एक इंस्ट्रूमेंट (instrument) के रुप में नहीं। पर सीवीसी की अपनी विश्वसनीयता नहीं रही है, अब वही पैनल बनाएंगे, जिन्होंने सरकार के कहने पर, प्रधानमंत्री के कहने पर काम किया, वो नहीं होना चाहिए। 


ये हमारी मांग है- सर्वोच्च न्यायालय को ये भी देखना है, पर उससे ज्यादा हाई लेवल कमेटी को भी ये देखना पड़ेगा कि वर्तमान डॉयरेक्टर के पूरे दो साल के कार्यकाल की जो अवधि है, वो उनको मिले और सीबीआई के अगले डॉयरेक्टर का निष्पक्ष चयन हो, ताकि इस संगठन के लिए, अपनी छवि को ठीक करना और लोगों का विश्वास पुनजीतना संभव हो सके, जिसकी आज बेहद जरुरत है। 


तीसरा जो जरुरी है, उस पूरे घटनाक्रम की जांच करना कि क्या कारण था, किस चीज से प्रधानमंत्री और सरकार घबराई थीक्या मध्यरात्रि में ऐसे फैसले होते हैं? जो शायद युद्ध की स्थिति में, आपात स्थिति में लिए जाते हैं? सारे भारत सरकार के मंत्रालय बड़ी-बड़ी संस्थाओं पर सुरक्षा की व्य़वस्था केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की होती है, चाहे वो हमारे एयरपोर्टस हैं, मेट्रो स्टेशनस हैं, चाहे सारे मंत्रालय हैं, सबके लिए CISF होती है। उस दिन CISF को क्यों हटाया गया, दिल्ली पुलिस को क्यों मध्यरात्रि को चार्ज दिया गया, वो भी खान मार्केट में बुलाकर अधिकारियों को कहा जाता है? कभी सुना नहीं हमने ऐसा और जो सीवीसी जिसके कागज पर, सिफारिश पर सीबीआई डॉयरेक्टर का तबादला किया जाता है, वो भी रात के 12 -1 बजे वहीं पहुंच जाते हैं, उनके साथ डीओपीटी के सेक्रेटरी भी, मैंने तो कभी नहीं सुना कि सरकार के सेक्रेटरी और सीवीसी रात के एक बजे काम कर रहे होते हैं, पर वो भी पहुंच गए। दूसरा जो कार्यवाहक डॉयरेक्टर हैं, उनको ऑफिशियली लगा दिया गया, सूचना है कि फाइलें निकाल ली गई, सीवीसी का काम क्या रात को जाकर फाइलें निकालना हैइस घटनाक्रम की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। ये जांच सरकार नहीं करा सकती है। उसके लिए एक निष्पक्ष समिति बननी चाहिए, जो सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी के अंदर काम करे और उन गलत कामों की, गलत फैसलों की जवाबदेही तय करे, जो हुए हैं। 


Shri Anand Sharma said- As I have said that the events of the last few days have once again taken the national attention back to the episode of 23rd of October or the midnight of 23rd and 24th October, when the CBI director was abruptly transferred in a illegal manner, because of a recommendation- based on a recommendation of the CVC was no authority to appoint, transfer or remove the CBI director under law and the Supreme Court has said so in clear terms.


The Government is brazening it out, the Prime Minister is arrogant. He will never apologize for wrong deeds; he thinks that he is not accountable either to Parliament or to the law of the land. But, after that why is there panic in the Government? What is the Prime Minister worried about? What is it that he does not want the CBI to look into? There is something. The manner of removal, midnight raid, change of the security agencies from CISF to Delhi Police, CVC personally going there at midnight, past midnight along with the DOPT secretary, who had issued the order, removing files, breaking open offices, That has to be investigated. It is clear that the Prime Minister is in a tearing hurry, pushing the high level committee that he chairs to look for a successor, giving a message that though the Supreme Court has restored the CBI director to his position, he is not allowed to function, they are in a tearing hurry again to appoint a successor to make the CBI Director ineffective or lame duck. That is the intent. The entire process is vitiated. The same CVC, who should have resigned, who has no moral right to stay in office, will be used as a tool again because the CVC under the act the Appointment Procedure will send a panel. So, where is the fairness now? There will be no justice. A handpicked nominee of the Prime Minister will be put in office of a CBI director with tenure of two years. So, that all the wrong doings of this Government will be somehow covered and a pliant director who will be obliged to prime Minister who himself is in his last days in office. These are fundamental questions. Normally, these questions would not have been raised by us if what has happened, had not happened.


So there should be now a committee, which has credibility and particularly I am talking of Prime Minister will be there, Chief Justice of India will be there, the leader of opposition Kharge Ji is there, but what about the CVC? Who is in fact the fulcrum and that we hope will be looked into and the present director should get his full tenure. Those 77 days, which was stolen from him illegally, should be given back to him, so that he completes his two years. Also whatever is the CVC report, should be shared and it should have been shared with all members of the committee in particular Mallikarjun Kharge Ji and under the principle of natural justice the CBI director also has every right to have a copy of that, to respond to that and to get a fair opportunity.


The Prime Minister of India has not shown such hurry in any matter. He is not bothered and the question is why he runs away from the Parliament? He is visible everywhere, but when we raised the issues in Rajya Sabha, they did not allow, despite saying so Government is ready for debate on Rafale. I said so even yesterday or day before, but we were not allowed because we would have put him in a corner, which he belongs and forced the Government to ferret out, the information which they are hiding.  


Prime Minister himself is complicit. It is the Prime Minister who took the decision. It is the prime Minister alone who was privy to the facts that he was going to cut out HAL. He was going to scrap a tender that was alive and a contract that was negotiated based on that global tender in the selection of Rafale Jet Fighter 126 in numbers. It was only the Prime Minister, I have said so in the past and I am repeating, because it is relevant, who could have informed Mr. Anil Ambani to setup a company, otherwise the Defence Minister of India did not know, the Foreign Secretary of India did not know about the company. The Defence Secretary was unaware, even the CEO of Dassault was not aware the Indian Air force Chief, Arup Raha, the Air Chief Marshal. Eric Trappier - the CEO of Dassault and the then CMD of HAL jointly met the Press on 25th of March, 2015. You are privy to what the Foreign Secretary said on 8th of April, in a press conference that the Rafale was not on the agenda but on 10th everything changes.


Why is the Government not revealing the drafts that were exchanged of the Joint Statement? Its para 14 was added later. It was not part of the Agenda. Therefore, only the Prime Minister can answer neither Arun Jaitley can answer for him, the Finance Minster nor can Smt. Nirmala Sitharaman speak for the Prime Minister because they were not there, when Prime Minister met with the then French President François Hollande and the then French President has gone on record saying that he had no option, France had no option, but to give this to the Indian Partner and the Indian Partner also for the Joint adventure in MEHAN, don’t forget in 51-49 is the equity holding between this company, which was established if you count from tenth to be barely two weeks before and the other company, which was registered subsequent that, without any experience, zero experience.


Prime Minister has not, please note, Shri Narendra Modi Prime Minister of India has not himself contradicted what the then French President had said until today. He avoided Parliament because he knows he can not contradict the French President. I had demanded in Parliament from the External Affairs Minister, the minutes of the Meeting, because it was not a private meeting between two friends, there is a Prime Minister of India was on an official visit and he was meeting the French President. So, both the Government has kept the minutes that is the rule, the procedure that’s why the Prime Minister is quiet. That’s why they are not revealing the minutes. The moment of minutes are revealed, it will come out, what he said and he does not want to make a false statement on the floor of the house, he can make so outside because in Parliament it will straight away attract the charge of breach of privilege. This is the real reason of the Prime Minister absenting himself or not speaking, when this issue was discussed at least the lower house, when the Congress President Shri Rahul Gandhi demanded answers. If not we challenge him today let him stand up and contradict the French President. Those who understand law and law of evidence they know that what is the best proof when two people meet particularly at this level or that matter on any level.


If one has made a statement, it has the force of truth and that is the best proof because only two people were there. The only way it can be controverted, is if the other person controverts it and there is enough evidence proof to back up that contra version. 


तो प्रधानमंत्री जी की सीधी जवाबदेही बनती है और इनकी घबराहट से और जिस ढंग से कल से ये काम कर रहे हैं, तो सीबीआई के डायरेक्टर अपने दफ्तर में लौटे भी नहीं थे, तब से ही प्रधानमंत्री और उनका कार्यालय काम में लग गया था। हमें कोई उम्मीद नहीं है कि इस पर प्रधानमंत्री जी की तरफ से उनका कोई जवाब आएगा। प्रधानमंत्री जी को कुछ महीनों के बाद 5 साल हो जाएंगे, संसद में इन्होंने एक भी प्रश्न का उत्तर नहीं दिया है, राफेल की तो बात छोडिए। जब 3-4 बार भाषण दिया, तो एक तरफा भाषण किया, सवाल का जवाब नहीं देते हैं। आप सब लोग हैं, हमारी सहानुभूती भारत के तमाम मीडिया के साथ है, आपके साथ है, कि आपको वो सौभाग्य नहीं प्राप्त है, जो दुनिया भर में पत्रकारों को मिलता है कि वो राष्ट्रपति से या प्रधानमंत्री से सवाल कर सकें, जवाब ले सकें, कभी मिलेगा भी नहीं, इनके होते नहीं मिलेगा, लेकिन कुछ महीनों के बाद मिलेगा, जब नए प्रधानमंत्री आएंगे, क्योंकि मैं पहले भी कह चुका हूं इनकी विदाई निश्चित है। मुझे सिर्फ यही कहना है कि जो हो रहा है वो नहीं होना चाहिए, इस पर रोक लगनी चाहिए, वरना ऐसा एक और ऐसा फैसला होगा, जिससे संस्थाओं को चोट पहुंचेगी, जिनको सही मायने में तंदुरुस्त करने में भी बहुत समय लगेगा। 

                  

On a question that, are you suggesting that Kharge Ji did not get any CVC report last night, Shri Sharma said- Well, it was on insistence that it has been shared because it was the Supreme Court’s view. It was the committee’s view. So, it was not the Prime Minister. It is not the Prime Minister who has obliged. But, it should have been made available earlier. If the report was with the Prime Minister or the Government and with the Supreme Court then in all fairness the only other member, who should have it, is the opposition leader that’s Kharge Ji. But what are pointed out is the panic and the hurry?


एक प्रश्न पर कि 2019 के चुनाव को लेकर जो कांग्रेस की बैठक हुई है, क्या उसमें राफेल मुद्दे को लेकर भी रणनीति तैयार की गई है, श्री शर्मा ने कहा कि चुनाव की तैयारी चल रही है, उसमें एक ही मुद्दा नहीं होता है, कई मुद्दे हैं, ये विषय भी है। ये विषय जनता के सामने है। पर राष्ट्रीय चुनाव हैं, राष्ट्रीय चुनाव में तमाम वो विषय होंगे, जो राष्ट्रीय चिंता के हैं, राष्ट्रीय प्राथमिकता के हैं या लोगों से संबंध रखते हैं।


एक अन्य प्रश्न पर कि क्या इस बैठक में उत्तर प्रदेश के गठबंधन को लेकर भी चर्चा हुई है, श्री शर्मा ने कहा कि हर विषय पर चर्चा होती है, पर वो पत्रकार सम्मेलन में दोहराया नहीं जाता है, उसकी संवेदनशीलता रहती है। हम ये कह सकते हैं कि अभी तो हर स्तर पर संगठन की हमारी तैयारियां चल रही हैं। आज सारे राज्यों के अध्यक्ष, महामंत्री और इंचार्ज बुलाए गए थे और अभी भी बैठक चल रही है, सारे फ्रंटल ऑर्गेनाइजेशन की कई बैठकें हो चुकी हैं और काम चल रहा है। हम अगले महीने सैंकिड हॉफ में कांग्रेस के कैंपेन को रोल आउट करेंगे, 15 फरवरी के बाद। तो आपको सब पता लग जाएगा, क्योंकि वो लंबा कैंपेन होगा, फरवरी से मई तक चलेगा, जब तक अंतिम चरण में मतदान नहीं होता। 


एक अन्य प्रश्न पर कि राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष श्री राहुल गांधी को नोटिस भेजा गया है, क्या कहेंगे, श्री शर्मा ने कहा कि इसको तो हमला नहीं कहते हैं, वास्तविकता की अभिव्यक्ति तो बदनाम करने की बात नहीं होती। किसी को याद दिलाना, तो इससे कौन सी लकीर उन्होंने पार कर दी, ये कोई बुरी बात नहीं है। महिला आयोग तब निद्रा अवस्था में था, प्रधानमंत्री ने अपने पद की मर्यादा को गिराते हुए जब उन्होंने अपमानजनक शब्दों का, एक ऐसी भाषा और शैली का प्रयोग किया जो राजनीतिक संवाद में स्वीकार नहीं किए जा सकते, शालीनता तो उनमें कभी नहीं रही। उन्होंने राज्यों के चुनाव में श्रीमति सोनिया गांधी के बारे में जो कहा, निरंतर जो वो बोलते हैं, वो देश के प्रधानमंत्री हैं, उनको ये क्या शोभा देता है? जिस तरह की भाषा का प्रयोग वो अपने भाषणों में करते हैं, आप भी देखते हैं, क्या कहते हैं तालियां बजा-बजा कर, क्या ये प्रधानमंत्री का काम हैदेश का दुर्भाग्य है कि प्रधानमंत्री ऐसे हैं जो दुर्भावना से काम करते हैं, जिनकी जुबान में कड़वाहट है, जिनमें शालीनता नहीं है, पद की मर्यादा को नहीं समझते हैं। तो महिला आयोग ने तब क्यों नहीं नोटिस दिया था नरेन्द्र मोदी जी कोउनसे जवाब मांगे कि आप ऐसी बातें क्यों करते हैं, आपने क्या शब्द इस्तेमाल किए हैंदोहरे मापदंड थोड़े होंगे, ये तो राजनीति से प्रेरित हैं, जो आप मुझे बता रहे हैं। 


On a question that Supreme Court had said that the meeting of selection committee has to decide within the week, Shri Sharma said- I have made my comment, I am not sharing the meeting, that is shared by Shri Narendra Modi, but, what I am saying, this is a process which has to be completed in a fare and transparent manner. Now, it is initiated based on a penal that is recommended by the CVC. CVC stands exposed, compromised. After the Supreme Court judgment and I am repeating, if you go by the moral authority, the present CVC has none, it should have quit. He has taken forward a partisan agenda to the extent as I have explained, being there even at 12 midnight and 1am in the morning. That is not the job of the CVC but he was doing.    


On another question that whether Congress Party is satisfied with nomination of another SC Judge in the place of Chief Justice, Shri Sharma said- It is not a question of our satisfaction. The Chief Justice of India or its representative that’s what the law is for constitution of High Powered Committee. So the Chief Justice was nominated his second senior most Judges. 



     

  Sd/-

(Vineet Punia)

Secretary

Communication Deptt. 

AICC