Chowkidar Modi’s latest attack on democracy

Chowkidar Modi’s latest attack on democracy Fri, 26 Oct 2018

चौकीदार का लोकतंत्र पर ताजा हमला

भाजपा राज में असल में तबाही का मंजर है, सत्ता के दुरुपयोग और असंवैधानिक हरकतों से पूरा माहौल अराजक हो गया है। मोदी सरकार ने हाल ही में एक और संस्थान पर आक्रमण कर दिया - इस बार सीबीआई - जो लोकतंत्र को कमजोर करने और संवैधानिकता को तार-तार करने की उसकी लगातार कोशिशों का एक और उदाहरण है।

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बुरी तरह से घबरायी और बौखलायी सरकार ने तख्तापलट की तर्ज पर आधी रात को सीबीआई निदेशक को हटा दिया, यह सरकार की मनमानी और संवैधानिक शक्तियों के दुरुपयोग को प्रकट करता है। भाजपा ने इसे जायज ठहराते हुए दावा किया कि यह एक असामान्य परिस्थिति से निपटने का उचित प्रयास था, लेकिन असलियत ये है कि प्रधानमंत्री के पसंदीदा अधिकारी राकेश अस्थाना को बचाने के लिये ये सब किया गया। दूसरी तरफ देश की सबसे प्रतिष्ठित जांच एजेंसी के मुखिया आलोक वर्मा, जो कई ‘राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों’ की जांच कर रहे थे, को भी अपने रास्ते से हटाने की कोशिश की गयी है। कांग्रेस अध्यक्ष ने साफ कहा कि सरकार का यह अभूतपूर्व कदम एक के बाद एक उजागर हो रहे भ्रष्टाचार के मामलों को दबाने और सबूतों को मिटाने की कोशिश है।


प्रधानमंत्री और सरकार के साथ आलोक वर्मा की तनातनी तब शुरु हुई जब उन्होंने पीएम के पसंदीदा अस्थाना के प्रमोशन का विरोध किया और यह चिंगारी पूरी तरह तब भड़क गयी जब उन्होंने प्रशांत भूषण और अरुण शौरी द्वारा राफेल घोटाले पर दायर की गई शिकायत का संज्ञान लेते हुए अस्थाना के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। राफेल सौदे के संबंध में रक्षा मंत्रालय के महत्वपूर्ण पत्रों और दस्तावेजों की मांग से सकते में आयी मोदी सरकार के शीर्ष हलकों में हड़कंप मच गया और नुकसान को थामने की कोशिशें शुरु हो गयीं, अब खुद को और अपने पूंजीपति मित्र के हितों की रक्षा के लिये सरकार के सामने वर्मा को सीबीआई से निकालने के अलावा कोई चारा नहीं बचा। दिलचस्प बात यह है कि सीबीआई निदेशक को केवल दो बार अपने पद से हटाया गया है और दोनो ही बार केंद्र में भाजपा की सरकार थी और दोनो बार ही अंबानी परिवार को बचाने के लिये ऐसा किया गया।


पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने ईडी, सीबीआई और आईबी का सहारा लेकर राजनीतिक प्रतिशोध और बदले की भावना से काम किया है और इन संस्थानों का राजनीतिकरण किया है। जबकि इनको स्वायत्तशासी संस्थान के तौर पर काम करने के लिये बनाया गया था। वर्मा को पद से हटाने के अगले ही दिन सरकार आईबी से उनकी जासूसी कराते हुए भी पकड़ी गयी, जो इस बात को साबित करता है कि मौजूदा सरकार जमकर संस्थानों में घुसपैठ और दखलंदाजी कर रही है। यह भी स्पष्ट है कि सरकार इस एजेंसी को अपनी कठपुतली बनाये रखने और उसका बेजा इस्तेमाल करने के लिये हर संभव कोशिश कर रही है और इन्हीं कोशिशों के क्रम में उसने अपने करीबी लोगों को इन संस्थानों में महत्वपूर्ण पदों पर भरने का भी काम किया है।


मोदी सरकार पूरी तरह से अपनी विश्वसनीयता खो चुकी है। भाजपा ने जिन दूसरे संस्थानों में दखलंदाजी की कोशिश की है, उनकी तरह ही सीबीआई को भी अपना शिकार बना लिया है। अब यह जरुरी हो गया है कि देश के लोग हमारे लोकतंत्र पर हो रही सीधे प्रहार के खिलाफ विरोध के लिये उठ खड़े हों।

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