Hypocrisy 101: Rupee & Petrol Crisis Not Because of Us!

Hypocrisy 101: Rupee & Petrol Crisis Not Because of Us! Fri, 07 Sep 2018

ढोंग 101 : रुपया और पेट्रोल संकट हमारे कारण नहीं!

हालिया कैबिनेट प्रेस ब्रीफिंग में वित्त मंत्री अरुण जेटली को मनमाने और गुमराह करने वाले तरीके से रुपये की कीमत में हो रही गिरावट का बचाव करते हुए देखा गया। कुछ समय पीछे जा कर 2013 को याद करें तो श्रीमती सुषमा स्वराज के साथ श्री जेटली रुपये की कीमत में मामूली गिरावट के लिए यूपीए सरकार पर हमला करते हुए तमाम आरोप लगा रहे थे।

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साल और सत्ता बदलने के साथ ही वित्त मंत्री का पाखंड और सबसे महत्वपूर्ण, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बेशर्मी को कोई भी देख सकता है, खास तौर पर तब, जबकि रुपया रोजाना रसातल में गिरता जा रहा है और नये-नये रिकार्ड बना रहा है। आज 69, कल 70 और अगले दिन 71 - इतनी कम कीमत इससे पहले कभी नहीं हुई।



इससे पहले हर बार श्री नरेंद्र मोदी और श्री अरुण जेटली यूपीए सरकार पर दोष मढ़ते हुए कहते थे कि ‘‘इसके लिये यूपीए सरकार जिम्मेदार है।’’ लेकिन उनके वही बयान उनके ही राज में दोगुने वजन के साथ उन पर गिर रहे हैं क्योंकि उन्होंने पूरी भारतीय अर्थव्यवस्था को मजाक बना दिया है।


वित्त मंत्री जी ने तो रुपये की गिरावट का कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को बताया और कहा कि इसके पीछे कोई घरेलू कारण नहीं है, जबकि सच्चाई ये है कि जब तेल की कीमतें कम हो रही थी तो उपभोक्ताओं को इसका कोई फायदा नहीं होने दिया गया। मनमाने तरीके से टैक्स बढ़ाकर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में हो रही कीमतों की कमी का कोई फायदा आम उपभोक्ताओं को नहीं लेने दिया गया। इससे किसी को भी हैरानी होगी कि आखिर ये मुनाफा किसकी तिजोरियों में भरा जा रहा है? क्योंकि इतना तो तय है कि आम लोगों को इसका कोई फायदा नहीं मिला।


तो अगली बार जब आप इस खबर को पढ़े कि ‘‘रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर’’ या ‘‘पेट्रोल कीमतें आसमान छू रहीं और 86 रुपये प्रति लीटर के नये रिकार्ड पर’’ पहुंची, तो बिल्कुल हैरान न हों। बस ये समझ लीजिएगा कि ये सब व्यक्ति के कारण हो रहा है जिसकी तस्वीर देश के हर पेट्रोल पंप पर जबरदस्ती और मजबूती से चिपकवाई गयी है।

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