Indira Awaas Yojana: Everything you need to know

Indira Awaas Yojana: Everything you need to know Mon, 29 Oct 2018

इंदिरा आवास योजना: आपके लिये जरुरी हर जानकारी

इंदिरा आवास योजना क्या है?

राजीव गांधी के नेतृत्व में 1985 में सरकार ने सार्वजनिक आवास योजना शुरू की जिसे इंदिरा आवास योजना के तौर पर जाना जाता है। यह योजना ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारंटी योजना (आरएलईजीपी) का ही एक स्वरूप है। इस योजना का शुभारंभ ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को एक समान आवास प्रदान करने के लिए किया गया था। यह योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत चलायी गई थी जहां प्राथमिक उद्देश्य गरीबों को अपने रहने के लिये छत/आवास प्रदान करना था। इस कार्यक्रम के तहत विशेष रूप से गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले (बीपीएल) परिवार, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति श्रेणियों में आने वाली आबादी को शामिल किया गया, ताकि उनकी आवास की जरुरतों को पूरा किया जा सके। 1996 में इंदिरा आवास योजना स्वतंत्र योजना बन गई और ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधीन आ गई। हालांकि इस योजना मुख्य उद्देश्य सभी को आवास प्रदान करना था, लेकिन साथ ही इसका प्रमुख लक्ष्य ग्रामीण आबादी के सामान्य जीवन स्तर का उन्नयन करना था और विभिन्न विकास कार्यक्रमों के जरिए ग्रामीण गरीबी उन्मूलन भी इसका उद्देश्य था।

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यह देश के लिये महत्वपूर्ण क्यों थी?

ग्रामीण आबादी की आवास जरुरतों को पूरा करने के मुख्य लक्ष्य के कारण ही इंदिरा आवास योजना राष्ट्र के लिए सर्वोपरि थी। इंदिरा आवास योजना (आईएवाई) से पहले भी कई अन्य योजनाएं थीं, जिसमे कुछ योजनाओ के अंतर्गत आवास प्रदान किए जाते थे और कई योजनाओ के अंतर्गत आवास निर्माण की लागत भी वसूली जाती थी। इंदिरा आवास योजना (आईएवाई) को जवाहर रोजगार योजना (जेआरवाई) की उप योजना माना जाता है। शुरूआत में इंदिरा आवास योजना को, जेआरवाई के द्वारा केवल 6 प्रतिशत धन आवंटित किया गया था, जिसे बाद में जेआरवाई ने दोगुना कर दिया था। केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों ने 75ः25 के अनुपात में इस योजना को धन वितरित करके अपना-अपना योगदान दिया है। सिक्किम और उत्तर-पूर्वी राज्यों ने 90ः10 के अनुपात में इस योजना को धन आवंटित करके अपना योगदान दिया है। इस योजना का शुभारंभ गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापने करने वाले परिवारों को आवास प्रदान करने लिए किया गया था, जिसमें मैदानी क्षेत्रों में घर बनाने वाले परिवारों के लिए 45,000 रुपये और पहाड़ी और ऊंचे क्षेत्रों में घर बनाने वाले परिवारों के लिए 48,500 रुपये का निर्धारण किया गया था। 1 अप्रैल 2013 से वित्तीय सहायता की राशि बढ़ाकर 70,000 रुपये और 75,000 रुपये कर दी गई है। इंदिरा आवास योजना (आईएवाई) के लाभार्थी घर बनाने के लिए मात्र 4 प्रतिशत के वार्षिक ब्याज पर 20,000 रूपए तक का ऋण लाभ भी ले सकते हैं। इस प्रकार, इंदिरा आवास योजना (आईएवाई) द्वारा दिए जाने वाले ऋण लाभ को कच्चे घरों में रहने वाले लोग पक्का घर बनवाने के लिये भी प्राप्त कर सकते हैं।


इंदिरा आवास योजना के फायदे

  • इंदिरा आवास योजना का लक्ष्य ग्रामीण इलाकों में घरों के निर्माण में सहायता प्रदान करना है।
  • इंदिरा आवास योजना घर के भीतर कार्यस्थलों सहित आवश्यक आपूर्ति के साथ घरों के निर्माण में मदद करती है।
  • इंदिरा आवास योजना के तहत घरों को रहने की जरुरत के हिसाब से डिजाइन किया जाता है।
  • इंदिरा आवास योजना का उद्देश्य घर बनाने के लिये स्थानीय तौर पर उपलब्ध सामग्रियों का उपयोग है, जो निर्माण के बाद कम से कम तीस साल तक टिकाऊ हो।
  • इंदिरा आवास योजना ऐसी सामग्री और प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देती है जो रोजगार सृजन के साथ ही किफायती और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ दोनों हो।
  • इंदिरा आवास योजना का उद्देश्य पंचायतों को सशक्त बनाना और प्रोत्साहित करना भी है, ताकि वे प्रभावी रूप से आवास कार्यक्रम को लागू करवाने में अग्रणी भूमिका निभा सकें।


इंदिरा आवास योजना का नाम बदलने का कारण

मोदी सरकार ने इंदिरा आवास योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री आवास योजना कर दिया। हालांकि, मोदी सरकार ने इस योजना के नामकरण में बदलाव के किसी खास कारण को बताया नहीं, लेकिन आलोचकों का मानना है कि भाजपा सरकार ने वर्षों से जारी इस योजना की सफलता को मिटाने के लिये नाम बदलने का यह कुत्सित प्रयास किया है। मोदी सरकार ने घर बनाने की मौजूदा योजना में सुधार और नये बदलाव जोड़ने का वादा करके इसे पेश किया। लेकिन मोदी राज में गरीबों के लिये घर बाने की प्रगति में पहले के मुकाबले भारी गिरावट दर्ज की गयी है। 2015 के वित्तीय वर्ष में 25.19 लाख घरों के लक्ष्य के सापेक्ष केवल 9.80 लाख घरों का निर्माण निराशाजनक तस्वीर पेश करता है।

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