Our Republic

Our Republic Sat, 26 Jan 2019

हमारा गणतंत्र

इस वर्ष भारत ने अपना 70वां गणतंत्र दिवस मनाया, यानी गणतंत्र के 69 वर्ष पूरे हुए। 7 दशकों से हमारा देश बदलते समय के साथ विकसित हुआ और आगे बढ़ा है। हमने आर्थिक और कृषि क्रांतियां, बड़े संघर्ष और सामाजिक आंदोलनों को देखा है, हमने नेताओं के उत्थान और पतन को देखा है, लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि हमने इस गणतंत्र पर आधारित अपने पूर्वजों की लोकतांत्रिक भावना को बनाये रखा है।


26 जनवरी का दिन बेहद खास है इस दिन हम देश के सर्वोच्च कानून यानी भारत के संविधान का सम्मान करते हैं, यह आज ही के दिन वर्ष 1950 में लागू हुआ था। हम सभी के लिये यह जानना दिलचस्प है कि हमारे संविधान को संविधान सभा ने 26 नवंबर, 1949 को अपनाया था। 26 जनवरी की तारीख को गणतंत्र दिवस के रूप में चुना गया था, क्योंकि 1930 में इस दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अंग्रेजों द्वारा प्रस्तावित उपनिवेश दर्जे का विरोध करते हुए भारतीय स्वतंत्रता (पूर्ण स्वराज) की घोषणा की थी। इस प्रकार आज के ही दिन भारत संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ा था।

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जो लोग इस बात पर हैरानी जताते हैं कि हमें अपने संविधान का जश्न मनाने की जरुरत क्या है तो उन्हें ध्यान रखना चाहिए कि हमारा संविधान हमारे लोकतंत्र की रीढ़ होने के अलावा दुनिया में सबसे अनूठा है। यह दुनिया का सबसे बड़ा, सबसे व्यापक संविधान है जो अपने नागरिकों के लिए मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों को विस्तार से बताता है। यह सख्ती और लचीलेपन का सही संतुलन बनाए रखता है जो संविधान को और अधिक बेहतर बनने में मदद करता है, लेकिन अपने बुनियादी ढांचे को बरकरार भी रखता है। न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्य संविधान की प्रस्तावना में शामिल हैं, जो इस बात को सुनिश्चित करते हैं कि लोगों की आशाएं और आकांक्षाएं संरक्षित हों और हमारे नागरिक किसी भी परेशानी के समय इसका सहारा ले सकें।


आज का दिन हम सभी को यह याद दिलाता है कि हमारा देश भारत राज्यों का एक संघ है, जैसा कि हमारे संविधान के अनुच्छेद 1 में लिखा हुआ है, यहां विभिन्न प्रकार के लोग एक देश के तौर पर आपसी मतभेदों के बावजूद एकजुटता के साथ रहते हैं, क्योंकि सभी का यह मानना है कि ऐसा करके ही वे बेहतर कर सकते हैं। ऐसे समय में जब दुनिया तेजी से ध्रुवीकृत हो रही है और विभाजनकारी राजनीति बढ़ती जा रही है, हमें एक साथ मिलकर खड़े होना चाहिए, हमें विविधता में भी एकजुट होकर ऐसा मार्ग प्रशस्त करना चाहिए, जिसका बाकी दुनिया अनुसरण कर सके।


इसलिए इस साल अपने मूल की ओर वापस लौटें और न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के उन आदर्शों की दिशा में काम करें जो हमें भारतीय होने पर गर्व कराते हैं।


जय हिन्द!

जय भारत!

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