The Personal is Political

The Personal is Political Thu, 21 Feb 2019

व्यक्तिवादी राजनीति

इस बात में अब कोई शक नहीं बचा कि पिछले 5 वर्षों में भाजपा ने भारत और भारतीयों को बेहद करीने से दो भागों में बांट दिया है - हिन्दू और गैर-हिन्दू तथा हिंदी भाषी और गैर-हिंदी भाषी।


आज अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस है। भारत में आधिकारिक तौर पर 22 मान्यता प्राप्त भाषाएं बोली जाती हैं, जिन्हें 720 से अधिक बोलियों के साथ 13 विभिन्न लिपियों में लिखा गया है। हमारे आदिवासी दर्जनों भाषाएं बोलते हैं, जो सदियों पुरानी कहानियों और गीतों, पाठों और श्रम को अपने साथ लेकर चलती हैं। भाषा हमारी दादी की रसोई, हमारे पहले खेल के मैदानों, हमारी माताओं की लोरियों की खुशबू से ओतप्रोत होती है। तमिल से लेकर बंगाली, गुजराती से लेकर कन्नड़ तक, हमारी विविधता भारत की मिट्टी से पैदा होने वाली भाषाओं में चमकती है।

Read this story in English

पुलवामा में हुए हृदयविदारक और दुर्भाग्यपूर्ण हमले का आज छठवां दिन भी है, जिसमें हमारे बहादुर जवानों ने अपनी जान गंवायी। भारतीय सेना और उसके जवानों पर पूरा देश दिलो-जान से अटूट भरोसा करता है। इस महान् संस्था में देश के कोने-कोने से भारतीय देश सेवा की भावना के साथ शामिल होते हैं। विभिन्न भाषाओं की दर्जनों बोलियां बोलने वाले बहादुर युवा, विभिन्न धर्मों और विभिन्न संस्कृतियों का पालन करते हुए एकजुट होकर भारत के झंडे के नीचे आते हैं, और देश के लिए आपसी भाईचारे के साथ काम करते हैं। ये कायराना हमला कश्मीर की धरती पर हुआ और जवानों ने देश की सुरक्षा करते हुए अपनी शहादत दी, जिसकी सीमाएं कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैली हैं। जब दुश्मनों से देश की रक्षा करते हुए कश्मीरी धरती पर भारतीयों का खून गिरता है, तो पूरा देश कमजोर होने की बजाय और अधिक एकजुट व ताकतवर हो जाता है। हमारे जवानों की शहादत व्यर्थ नहीं जानी चाहिए। कश्मीर जितना भारत का हिस्सा है, उतना ही कश्मीरी लोग भी हैं। मेघालय के राज्यपाल तथागत रॉय जैसे नफरत फैलाने वाले, विभाजनकारी, युद्ध उन्माद पैदा करने वाले लोग शायद इससे सहमत नहीं होंगे। वो कश्मीर के लोगों और उत्पादों का ‘बहिष्कार’ कर सकते हैं, जिसका एकमात्र अर्थ भारत की धरती पर भारतीयों और भारतीय उत्पादों का बहिष्कार करना होगा। यदि ये काम गैर-देशभक्ति नहीं है तो फिर हमें नहीं पता कि ये क्या है। पूर्व गृह और वित्त मंत्री तथा वरिष्ठ कांग्रेस नेता श्री पी. चिदंबरम ने अपनी टिप्पणियों में इसे ‘दुर्भाग्यपूर्ण और विडंबनापूर्ण’ बताया है।


इस प्रकार का चुनौतीपूर्ण समय हम सभी के चरित्र की परीक्षा का समय है। भाजपा के लिये यह आत्मनिरीक्षण और आत्ममंथन का समय होना चाहिए। भाजपा को देश की सुरक्षा से समझौता करने और अपनी ओछी राजनीति से देश को विभाजित करने की बजाय, उससे पूछे जाने वाले सवालों का सामना करना होगा - जैसे कि 350 किलोग्राम आरडीएक्स, एम 4 कार्बाइन और रॉकेट लांचर को इतने कड़े नियंत्रण वाले इलाके में क्यों और कैसे पहुंचने दिया गया? यदि भाजपा और उससे जुड़े लोग यूपी में ‘संदिग्ध मांस’ का पता लगा सकते हैं तो फिर निश्चित रूप से सुरक्षा के इतने बड़े उल्लंघन से बचा जा सकता था! क्या सुरक्षा के सही उपाय किए गए थे? लेकिन पूरे देश ने देखा कि भाजपा सरकार के केंद्रीय पर्यटन मंत्री के. अल्फोंस ने वायनाड, केरल में शहीदों के ताबूत के साथ सेल्फी लेने जैसा शर्मनाक काम किया। वहीं दूसरी ओर पीएम मोदी ने शहीदों को श्रद्धांजलि देने की बजाय झांसी में अपनी राजनीति को ज्यादा तवज्जो दी और इसके कारण उनको दिल्ली पहुंचने में एक घंटे की देरी हुई। देश के प्रधानमंत्री को आत्ममुग्धता की बजाय देश को पहले रखना चाहिए, लेकिन शायद मोदी जी के सिद्धांत पूरी तरह से अलग हैं।


संदेश स्पष्ट है। भारतीयों के लिये पुलवामा में हमारे बहादुर जवानों पर किया गया कायराना हमला बेहद पीड़ादायक और घावों को हरा करने वाला अपमानजनक क्षण है, जबकि भाजपा देश और देशवासियों की सुरक्षा में सुधार करने के उपायों की तुलना में देश को बांटने में ज्यादा ध्यान दे रही है, ताकि उसे इसका चुनावी फायदा मिल सके। हम सभी देशवासियों के दिल में अपार दुःख है, हम ये कतई नहीं चाहते कि कश्मीर या कश्मीरियों का बहिष्कार किया जाए। हम सभी बस इतना ही चाहते हैं कि हमारी सुरक्षा में अपनी जान की बाजी लगाने वाले हर एक जवान को सुरक्षा और सम्मान मिले।

Volunteer with us
Follow us fb